CG News: वाह रे सिस्टम! कागजों में 1,036 आवास पूर्ण, जमीन पर 367 अब भी अधूरे; गरीबों पर कर्ज का बोझ, गहने गिरवी रखने की नौबत!
बिलासपुर/मस्तूरी। गरीब परिवारों को पक्की छत उपलब्ध कराने के उद्देश्य से शुरू की गई प्रधानमंत्री आवास योजना पर बिलासपुर जिले के मस्तूरी विकासखंड में गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। हितग्राहियों ने आरोप लगाया है कि कहीं मकान अधूरे छोड़ दिए गए, कहीं निर्माण की गुणवत्ता खराब है, तो कहीं आवास निर्माण की राशि के उपयोग को लेकर संदेह है। कुछ हितग्राहियों का दावा है कि मकान पूरा कराने के लिए उन्हें कर्ज लेना पड़ा, जबकि एक महिला ने पति की मौत के बाद गहने गिरवी रखकर निर्माण आगे बढ़ाने की बात कही है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब गरीब परिवार आज भी अधूरे मकानों और आर्थिक परेशानी से जूझ रहे हैं, तो सरकारी योजनाओं की निगरानी और निर्माण कार्यों का सत्यापन आखिर किस तरह किया जा रहा है?
सरकारी आंकड़े: 1,403 आवास स्वीकृत, 367 अब भी प्रगतिरत
मस्तूरी जनपद पंचायत के अंतर्गत मस्तूरी, मुड़पार (खोरसी) और टिकारी (नवागांव) में वर्ष 2016 से दिसंबर 2025 तक प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत कुल 1,403 आवास स्वीकृत किए गए। उपलब्ध सरकारी आंकड़ों के अनुसार, इनमें से 1,036 आवास पूर्ण और 367 आवास प्रगतिरत बताए गए हैं।
इन आंकड़ों में टिकारी (नवागांव) में 229 आवास प्रगतिरत हैं, जो तीनों गांवों में सबसे अधिक हैं। हालांकि, प्रगतिरत आवासों की संख्या अपने आप में किसी अनियमितता का प्रमाण नहीं है, लेकिन हितग्राहियों की शिकायतों के बीच निर्माण की वास्तविक स्थिति और सरकारी रिकॉर्ड का मिलान कराना जरूरी हो जाता है।
बिना निर्माण कार्य किए राशि निकालने का आरोप
मुड़पार (खोरसी) निवासी जग्गा सोनी ने आवास मित्र सुरेंद्र कुमार चतुर्वेदी पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका दावा है कि आवास निर्माण का काम किए बिना ही पूरी राशि निकाल ली गई। जग्गा सोनी के मुताबिक, उन्होंने संबंधित अधिकारियों से शिकायत भी की, लेकिन उन्हें अब तक अपेक्षित समाधान नहीं मिला। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि आवास मित्र से फोन पर संपर्क करने पर उनके साथ अभद्र व्यवहार किया जाता है और धमकी दी जाती है। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। मामले में संबंधित आवास मित्र का पक्ष और भुगतान संबंधी दस्तावेज सामने आना भी आवश्यक है। यदि शिकायत सही पाई जाती है, तो यह जांच का विषय होगा कि राशि किस आधार पर जारी की गई और निर्माण की प्रगति का सत्यापन किसने किया।
पांच हजार रुपये लेने का आरोप, फिर भी अधूरा मकान
खोरसी निवासी फुलचंद घृतलहरे का आरोप है कि आवास निर्माण शुरू करने से पहले आवास मित्र सुरेंद्र कुमार चतुर्वेदी ने उनसे 5,000 रुपये लिए। उनका कहना है कि इसके बावजूद मकान का काम अधूरा छोड़ दिया गया और निर्माण की गुणवत्ता पर भी सवाल हैं।
फुलचंद के अनुसार, उनके परिवार में पांच सदस्य हैं और वे अकेले कमाने वाले हैं। मकान पूरा कराने के लिए उन्हें कर्ज लेना पड़ा।
इस मामले में प्रमुख सवाल यह है कि निर्माण कार्य की वास्तविक स्थिति क्या है, हितग्राही को कितनी राशि जारी हुई और यदि अतिरिक्त रकम मांगी गई थी, तो उसकी जांच किस स्तर पर की गई?
पति की मौत के बाद गहने गिरवी रखकर आगे बढ़ाया मकान
मस्तूरी के वार्ड क्रमांक 12 की निवासी सरोजनी कुर्रे की परेशानी भी सामने आई है। उनके पति पंथी कुर्रे के नाम पर प्रधानमंत्री आवास स्वीकृत हुआ था। सरोजनी का आरोप है कि आवास मित्र टीआर जोशी ने लेंटर डाले बिना ही निर्माण अधूरा छोड़ दिया।
सरोजनी के अनुसार, पति की मृत्यु के बाद मकान का काम आगे बढ़ाने के लिए उन्हें अपने गहने गिरवी रखने पड़े।
जिस योजना का उद्देश्य गरीब परिवारों को सुरक्षित आवास उपलब्ध कराना है, उसमें यदि किसी हितग्राही को अपने संसाधन गिरवी रखने की नौबत आती है, तो निर्माण की प्रगति, भुगतान और निगरानी की जांच बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है।
दरवाजा-खिड़की तक नहीं, उधार लेकर लगवानी पड़ी टीन की छत
टिकारी के आश्रित ग्राम नवागांव निवासी हीरालाल मिरी का आरोप है कि आवास मित्र उदय भार्गव ने उनके मकान का निर्माण डोर लेंटर तक कराया, लेकिन इसके बाद काम बंद कर दिया गया। हीरालाल का कहना है कि कई बार आग्रह करने के बावजूद निर्माण पूरा नहीं हुआ। मजबूरी में उन्हें उधार लेकर मकान में टीन लगवानी पड़ी। उनके मुताबिक, मकान में दरवाजा और खिड़की तक नहीं लगाए गए हैं तथा परिवार को अब भी मिट्टी के मकान में रहना पड़ रहा है। इस शिकायत के आधार पर यह जांच आवश्यक है कि आवास की स्वीकृत राशि के मुकाबले कितना निर्माण हुआ, कौन-कौन से भुगतान किए गए और अधूरे काम को पूरा कराने के लिए क्या कार्रवाई की गई।
एक लाख रुपये का कर्ज लेकर मकान पूरा कराने का दावा
हितग्राही सोहन सोनी का आरोप है कि आवास मित्र ने कुछ समय तक निर्माण कार्य कराया और फिर काम बंद कर दिया। बार-बार कहने के बावजूद काम शुरू नहीं होने पर उन्हें लगभग एक लाख रुपये का कर्ज लेकर मकान पूरा कराना पड़ा।
सोहन सोनी ने आवास मित्र पर मकान निर्माण के लिए जारी राशि के दुरुपयोग का आरोप लगाया है। वहीं, लखनलाल भारद्वाज ने निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल उठाते हुए दावा किया कि पहली बारिश में ही मकान में सीपेज की समस्या सामने आने लगी।
इन मामलों में निर्माण की तकनीकी जांच, भुगतान का विवरण और हितग्राहियों के बयानों का सत्यापन कर वास्तविक स्थिति स्पष्ट की जा सकती है।
अधिकारी बोले—जानकारी नहीं, शिकायत सही मिली तो होगी कार्रवाई
मस्तूरी जनपद पंचायत की प्रधानमंत्री आवास योजना की ब्लॉक कोऑर्डिनेटर चेतना यादव के अनुसार, अधूरे आवास को पूर्ण दिखाए जाने की जानकारी उन्हें नहीं है। उन्होंने कहा कि यदि ऐसा कोई मामला सामने आता है और आवास मित्र लापरवाही करते पाए जाते हैं, तो कार्रवाई की जाएगी।
अधिकारी के इस बयान के बाद सवाल उठता है कि हितग्राहियों की ओर से किए जाने वाले शिकायतों का रिकॉर्ड क्या है? यदि शिकायतें पहले से दर्ज हैं, तो उनकी जांच की स्थिति क्या है? और यदि संबंधित कार्यालय को जानकारी नहीं है, तो शिकायतों को जिम्मेदार अधिकारियों तक पहुंचाने की व्यवस्था कितनी प्रभावी है? इन सवालों का जवाब शिकायतों की जांच, भुगतान रिकॉर्ड और मौके पर किए गए सत्यापन से ही मिल सकता है।
मुख्यमंत्री की चेतावनी के बाद अब जांच का इंतजार
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने प्रधानमंत्री आवास योजना के निर्माण में गड़बड़ी होने पर कार्रवाई की बात कही थी। मस्तूरी में हितग्राहियों की ओर से लगाए गए आरोपों के बीच अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि प्रशासन निर्माण की वास्तविक स्थिति की जांच कराता है या नहीं। जांच में यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि कितने आवास वास्तव में पूर्ण हैं, कितने अधूरे हैं, भुगतान किस आधार पर जारी हुए और क्या किसी मामले में नियमों का उल्लंघन हुआ है। यदि अनियमितता प्रमाणित होती है, तो संबंधित जिम्मेदारों पर नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए। मस्तूरी में मामला केवल 367 प्रगतिरत आवासों की संख्या का नहीं, बल्कि गरीब परिवारों के भरोसे का भी है। हितग्राहियों के आरोपों की निष्पक्ष जांच, सरकारी रिकॉर्ड का भौतिक सत्यापन और शिकायतों पर समयबद्ध कार्रवाई ही यह स्पष्ट कर सकती है कि योजना का लाभ जरूरतमंदों तक सही तरीके से पहुंचा या कहीं व्यवस्था की खामियों ने उनके लिए मुश्किलें बढ़ा दीं।







Post a Comment
0 Comments