बिलासपुर में मोहन भागवत का दो दिवसीय प्रवास, युवाओं को संघ से जोड़ने पर होगा मंथन; छत्तीसगढ़ के संगठनात्मक पुनर्गठन की भी तैयारी
22-23 अक्टूबर को कोनी के सरस्वती शिशु मंदिर में होंगी बैठकें; शताब्दी वर्ष के कार्यक्रमों की समीक्षा के साथ रायपुर-बिलासपुर में अलग-अलग इकाइयां बनाने पर चर्चा की संभावना
बिलासपुर। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत 22 और 23 अक्टूबर को बिलासपुर प्रवास पर रहेंगे। इस दौरान कोनी स्थित सरस्वती शिशु मंदिर में संघ के क्षेत्र, प्रांत और विभाग स्तर के पदाधिकारियों एवं कार्यकर्ताओं की बैठकें होंगी। इन बैठकों में संघ के शताब्दी वर्ष के कार्यक्रमों की समीक्षा, आगामी गतिविधियों की कार्ययोजना और संगठन विस्तार को लेकर चर्चा की जाएगी। बैठक में करीब 500 कार्यकर्ताओं के शामिल होने की संभावना है।
इस प्रवास को युवाओं के बीच संघ की पहुंच बढ़ाने और छत्तीसगढ़ में संगठनात्मक ढांचे में संभावित बदलाव के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि, संगठनात्मक पुनर्गठन और युवाओं को लेकर प्रस्तावित रणनीतियों पर अंतिम निर्णय की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
युवाओं को जोड़ने की रणनीति पर रहेगा जोर
देश में युवाओं के आंदोलनों और बदलते सामाजिक माहौल के बीच RSS आने वाले समय में 40 वर्ष से कम उम्र के लोगों को संगठन से जोड़ने पर विशेष ध्यान दे रहा है। इसके तहत संघ की शाखाओं के साथ-साथ उससे जुड़े अन्य संगठनों की गतिविधियों में भी युवाओं की भागीदारी बढ़ाने की रणनीति पर विचार किया जा सकता है।
इसी क्रम में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) और भारतीय जनता युवा मोर्चा (BJYM) से जुड़े युवाओं को भी संगठनात्मक कार्य, सामाजिक भागीदारी और युवाओं के बीच संवाद बढ़ाने के संबंध में मार्गदर्शन मिलने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि, इन दोनों संगठनों के युवाओं के साथ डॉ. भागवत की अलग बैठक या विशेष संबोधन का कार्यक्रम आधिकारिक रूप से पुष्ट नहीं है।
संघ की योजना अलग-अलग गतिविधियों, संवाद कार्यक्रमों और सामाजिक कार्यों के माध्यम से युवाओं को जोड़ने की है। सोशल मीडिया के जरिए संगठन के कार्यों और गतिविधियों की जानकारी अधिक से अधिक युवाओं तक पहुंचाने पर भी चर्चा हो सकती है।
छत्तीसगढ़ में RSS के दो हिस्सों में बंटने की संभावना
छत्तीसगढ़ में संघ की वर्तमान संगठनात्मक संरचना में बदलाव की संभावना भी इस प्रवास के दौरान चर्चा का विषय बन सकती है। संघ से जुड़े लोगों के मुताबिक, फिलहाल पूरे छत्तीसगढ़ की जिम्मेदारी प्रांत स्तर के संगठनात्मक ढांचे के माध्यम से संभाली जाती है। आने वाले समय में प्रदेश को रायपुर और बिलासपुर, दो अलग-अलग इकाइयों में बांटने के प्रस्ताव पर अखिल भारतीय स्तर की बैठक में विचार किया जा सकता है।
मिली जानकारी के अनुसार, वर्तमान में छत्तीसगढ़ प्रांत को 11 विभागों में बांटा गया है। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत रायपुर इकाई में छह और बिलासपुर इकाई में पांच विभाग शामिल किए जाने की योजना बताई जा रही है। इस बदलाव का उद्देश्य संगठन के कामकाज का विकेंद्रीकरण करना और क्षेत्रीय स्तर पर गतिविधियों को अधिक प्रभावी बनाना है।
प्रस्ताव लागू होने की स्थिति में मौजूदा पदों और जिम्मेदारियों में बदलाव हो सकता है तथा नई संगठनात्मक व्यवस्थाएं बनाई जा सकती हैं। डॉ. मोहन भागवत के प्रवास के दौरान इस विषय पर पदाधिकारियों के साथ विचार-विमर्श होने की संभावना है। हालांकि, विभाजन की अंतिम समयसीमा और नई संरचना को लेकर आधिकारिक घोषणा का इंतजार है।
दूसरे दिन प्रांत के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं की बैठक
प्रवास के दूसरे दिन छत्तीसगढ़ प्रांत के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं की बैठक प्रस्तावित है। इसमें बिलासपुर नगर के 11 उपनगरों सहित प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों से संघ के पदाधिकारी और कार्यकर्ता शामिल हो सकते हैं।
बताया जा रहा है कि यह बैठक संघ की आंतरिक संगठनात्मक समीक्षा और कार्ययोजना पर केंद्रित रहेगी। इसमें भाजपा सहित संघ के अन्य आनुषंगिक संगठनों के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं को शामिल नहीं किए जाने की जानकारी भी सामने आई है। हालांकि, बैठक में भागीदारी से संबंधित विस्तृत आधिकारिक कार्यक्रम की पुष्टि होना बाकी है।
शताब्दी वर्ष के कार्यक्रमों की होगी समीक्षा
शुक्रवार को प्रांत और विभाग स्तर पर बैठकों में संघ के शताब्दी वर्ष के तहत अब तक आयोजित कार्यक्रमों की समीक्षा की जाएगी। प्रांत, विभाग और योजना स्तर के प्रमुख अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करेंगे। इन रिपोर्टों के आधार पर कार्यक्रमों की प्रगति, कार्यकर्ताओं की भागीदारी और आगामी गतिविधियों की प्राथमिकताओं पर चर्चा की जाएगी।
बैठकों में संगठन के विस्तार, सामाजिक गतिविधियों और नई पीढ़ी के बीच पहुंच बढ़ाने जैसे विषयों पर भी विचार हो सकता है। इसके बाद भविष्य की कार्ययोजना तैयार करने की दिशा में निर्णय लिए जाने की संभावना है।
बौद्धिक वर्ग में भी संबोधन प्रस्तावित
निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, डॉ. मोहन भागवत नागपुर से गोंडवाना एक्सप्रेस के जरिए बिलासपुर पहुंचेंगे। प्रवास के दौरान शाम 7:30 बजे उनका बौद्धिक वर्ग में संबोधन प्रस्तावित है। इसमें संघ के विचारों, सामाजिक कार्यों और संगठनात्मक गतिविधियों से जुड़े विषयों पर मार्गदर्शन दिए जाने की संभावना है।
कुल मिलाकर, डॉ. मोहन भागवत का बिलासपुर प्रवास संघ के शताब्दी वर्ष की समीक्षा, युवाओं को संगठन से जोड़ने की रणनीति और छत्तीसगढ़ में संभावित संगठनात्मक पुनर्गठन के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इन विषयों पर होने वाली चर्चाओं के बाद संगठन की आगामी प्राथमिकताओं को लेकर तस्वीर अधिक स्पष्ट हो सकती है।






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