क्या आप जानते हैं? अपराध कहीं और हुआ है, फिर भी अपने नजदीकी थाने में दर्ज करा सकते हैं FIR! जानिए क्या है Zero FIR का नियम
प्रतीकात्मक तस्वीर
किसी के साथ अपराध हो जाए तो सबसे जरूरी है समय पर पुलिस को सूचना देना। बहुत से लोगों को लगता है कि जिस इलाके में अपराध हुआ है, FIR भी उसी इलाके के थाने में दर्ज होगी। लेकिन संज्ञेय अपराध की सूचना के मामले में कानून Zero FIR की सुविधा देता है, जिसके तहत क्षेत्राधिकार की सीमा के कारण शिकायत दर्ज कराने में देरी नहीं होनी चाहिए।
भारत में नए आपराधिक कानून लागू होने के बाद FIR दर्ज कराने की प्रक्रिया से जुड़ा यह महत्वपूर्ण प्रावधान भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS), 2023 की धारा 173 में दिया गया है। इस प्रावधान के अनुसार संज्ञेय अपराध से संबंधित सूचना अपराध वाले क्षेत्र की परवाह किए बिना पुलिस थाने के प्रभारी अधिकारी को दी जा सकती है।
क्या होती है Zero FIR?
Zero FIR ऐसी FIR है, जिसे उस पुलिस थाने में दर्ज कराया जा सकता है जिसके क्षेत्राधिकार में कथित अपराध नहीं हुआ है। इसका उद्देश्य यह है कि केवल थाना क्षेत्र का हवाला देकर संज्ञेय अपराध की सूचना दर्ज करने में देरी न हो।
ऐसी FIR को सामान्य FIR की तरह शुरुआती तौर पर शून्य क्रमांक यानी Zero Number दिया जाता है। इसके बाद संबंधित प्रक्रिया के अनुसार मामले को जाँच और आगे की कार्रवाई के लिए सक्षम क्षेत्राधिकार वाले पुलिस थाने को भेजा जा सकता है।
मान लीजिए बिलासपुर का कोई व्यक्ति रायपुर में ठगी, हमला या कोई अन्य संज्ञेय अपराध होने की शिकायत करना चाहता है, लेकिन वह उस समय बिलासपुर में मौजूद है। ऐसी स्थिति में वह अपने नजदीकी पुलिस थाने में घटना की सूचना दे सकता है। संबंधित पुलिस अधिकारी को केवल इस आधार पर सूचना लेने से इनकार नहीं करना चाहिए कि घटना दूसरे थाना क्षेत्र में हुई है। लागू कानूनी प्रक्रिया के अनुसार Zero FIR दर्ज कर आगे भेजी जा सकती है।
Zero FIR दर्ज कराने के लिए क्या करें?
- नजदीकी पुलिस थाने जाएँ: संबंधित संज्ञेय अपराध की सूचना थाना प्रभारी या ड्यूटी अधिकारी को दें।
- घटना की पूरी जानकारी दें: घटना कब और कहाँ हुई, क्या हुआ और उपलब्ध जानकारी के अनुसार कौन शामिल था, यह बताएँ।
- सबूत उपलब्ध कराएँ: फोटो, वीडियो, संदेश, दस्तावेज, लेन-देन का रिकॉर्ड या गवाहों की जानकारी, यदि उपलब्ध हो, तो दें।
- FIR दर्ज होने की जानकारी लें: शिकायत दर्ज होने पर उसकी प्रति और FIR का विवरण प्राप्त करें।
- आगे की कार्रवाई की जानकारी रखें: जरूरत पड़ने पर जाँच करने वाले संबंधित थाने या अधिकारी से संपर्क करें।
भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 173(1) संज्ञेय अपराध से संबंधित सूचना दिए जाने का प्रावधान करती है, चाहे अपराध किसी भी क्षेत्र में हुआ हो। धारा 173(2) के अनुसार दर्ज की गई सूचना की प्रति सूचना देने वाले व्यक्ति या पीड़ित को तत्काल और निःशुल्क दी जानी चाहिए।
क्या FIR की कॉपी के लिए पैसे देने पड़ते हैं?
नहीं। BNSS की धारा 173(2) के अनुसार दर्ज की गई सूचना की प्रति सूचना देने वाले व्यक्ति या पीड़ित को निःशुल्क दी जाती है। इसलिए FIR की कॉपी प्राप्त करने के लिए निर्धारित कानून के अनुसार कोई शुल्क नहीं देना होता।
अगर पुलिस FIR दर्ज करने से मना करे तो क्या करें?
यदि संज्ञेय अपराध की सूचना दर्ज करने से इनकार किया जाता है, तो BNSS की धारा 173(4) के अंतर्गत शिकायत का सार लिखित रूप में डाक द्वारा संबंधित पुलिस अधीक्षक (SP) को भेजा जा सकता है। यदि पुलिस अधीक्षक को सूचना से संज्ञेय अपराध का पता चलता है, तो वे कानून के अनुसार स्वयं जाँच कर सकते हैं या अधीनस्थ पुलिस अधिकारी से जाँच कराने का निर्देश दे सकते हैं। इसके बाद भी उचित कार्रवाई न होने पर सक्षम मजिस्ट्रेट के समक्ष कानून में उपलब्ध उपाय अपनाया जा सकता है।
क्या हर शिकायत में Zero FIR दर्ज होती है?
Zero FIR का प्रावधान संज्ञेय अपराध से संबंधित सूचना के लिए है। हर विवाद, सामान्य शिकायत या असहमति अपने-आप संज्ञेय अपराध नहीं बनती। शिकायत में बताए गए तथ्यों और लागू कानून के आधार पर पुलिस को उचित कानूनी प्रक्रिया अपनानी होती है। कुछ मामलों में विशेष कानूनों के अतिरिक्त प्रावधान भी लागू हो सकते हैं।
आपके सवाल, सीधे जवाब
1. क्या Zero FIR केवल बड़े अपराधों में दर्ज होती है?
Zero FIR का आधार संज्ञेय अपराध की सूचना और थाना क्षेत्राधिकार से जुड़ा है। इसकी पात्रता केवल इस बात से तय नहीं होती कि घटना लोगों को कितनी बड़ी लगती है। लागू कानून और घटना के तथ्य महत्वपूर्ण हैं।
2. Zero FIR दर्ज होने के बाद क्या होता है?
मामले को लागू प्रक्रिया के अनुसार सक्षम क्षेत्राधिकार वाले पुलिस थाने को भेजा जा सकता है, जहाँ आगे की जाँच और कार्रवाई की जाती है।
3. क्या ऑनलाइन सूचना भी दी जा सकती है?
BNSS की धारा 173 इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से सूचना देने की अनुमति देती है। ऐसी सूचना को रिकॉर्ड पर लेने के लिए कानून में निर्धारित तीन दिन के भीतर हस्ताक्षर की प्रक्रिया लागू होती है। इलेक्ट्रॉनिक सूचना देने और FIR दर्ज होने की प्रक्रिया में अंतर हो सकता है।
4. Zero FIR के लिए कौन-सी धारा याद रखें?
भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 173। खास तौर पर धारा 173(1) और निःशुल्क प्रति के लिए धारा 173(2) महत्वपूर्ण हैं।
आधिकारिक स्रोत
• गृह मंत्रालय, भारत सरकार — नए आपराधिक कानून
• पुलिस अनुसंधान एवं विकास ब्यूरो — Zero FIR और e-FIR की प्रक्रिया
• India Code — आधिकारिक अधिनियम और कानूनी प्रावधान

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