बिलासपुर में न्यायाधीश ही सुरक्षित नहीं, तो आम जनता का क्या? अभय बरुआ पर गंभीर आरोप, आधी रात जन्मदिन की पार्टी में बवाल
राजकिशोर नगर में देर रात नगाड़े और पटाखों के शोर का विरोध करने पहुंचे महासमुंद में पदस्थ न्यायाधीश और उनके परिवार से मारपीट का आरोप; पत्नी और साले को भी आई चोटें, दूसरे पक्ष की शिकायत पर भी काउंटर FIR
बिलासपुर। न्यायधानी बिलासपुर में कानून-व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े करने वाला मामला सामने आया है। शहर के राजकिशोर नगर में जन्मदिन की पार्टी के दौरान देर रात हुए विवाद में महासमुंद के कुटुंब न्यायालय में पदस्थ न्यायाधीश प्रफुल्ल कुमार सोनवानी और उनके परिवार के साथ कथित मारपीट का मामला सामने आया है। आरोप है कि जन्मदिन का जश्न मना रहे अभय बरुआ और उसके साथियों ने शोर-शराबे का विरोध करने पहुंचे न्यायाधीश और उनके परिजनों को घेरकर गाली-गलौज, मारपीट और जान से मारने की धमकी दी।
घटना ने इसलिए भी गंभीर रूप ले लिया है क्योंकि मामला किसी सामान्य विवाद का नहीं, बल्कि एक न्यायिक अधिकारी और उनके परिवार की सुरक्षा से जुड़ा है। सवाल उठ रहा है कि जब न्याय व्यवस्था से जुड़े अधिकारी और उनका परिवार ही अपने घर के आसपास सुरक्षित महसूस नहीं कर पा रहे हैं, तो आम नागरिकों की सुरक्षा को लेकर भरोसा कैसे कायम रहेगा?
आधी रात तक चलता रहा शोर, पटाखों और नगाड़ों से परेशान हुआ परिवार
मामला सरकंडा थाना क्षेत्र के राजकिशोर नगर का है। शिकायत के मुताबिक, 31 अक्टूबर 2026 की रात न्यायाधीश प्रफुल्ल कुमार सोनवानी अपने परिवार के साथ जूनियर एमआईजी-05 स्थित ससुराल पहुंचे हुए थे। रात करीब 11 बजे परिवार के सदस्य घर में सो रहे थे। इसी दौरान आसपास तेज आवाज में नगाड़े बजाने और लगातार पटाखे फोड़ने का सिलसिला शुरू हो गया।
बताया गया कि लगभग 45 मिनट तक शोर-शराबा जारी रहा। घर में मौजूद बच्चे और बुजुर्ग भी तेज आवाज से परेशान हो गए। इसके बाद न्यायाधीश स्थिति देखने और शोर बंद कराने की बात कहने के लिए घर से नीचे पहुंचे।
अभय बरुआ और उसके साथियों पर घेरकर मारपीट करने का आरोप
शिकायत के अनुसार, गली में करीब 100 से 200 लोगों की भीड़ जमा थी और वहां अभय बरुआ के घर के अंदर तथा बाहर जन्मदिन का कार्यक्रम चल रहा था। न्यायाधीश ने देर रात तेज आवाज में नगाड़े बजाने और पटाखे फोड़ने पर आपत्ति जताई।
आरोप है कि इसी बात को लेकर अभय बरुआ और उसके साथियों ने विवाद शुरू कर दिया। न्यायाधीश के साथ कथित तौर पर गाली-गलौज की गई, उन्हें जान से मारने की धमकी दी गई और हाथ-मुक्कों से मारपीट की गई।
पत्नी और साले के साथ भी मारपीट, चश्मा छीनने की शिकायत
विवाद की जानकारी मिलने पर न्यायाधीश की पत्नी आकांक्षा, साले अभिषेक भारद्वाज, सास नीरा भारद्वाज और साले की पत्नी गुरप्रीत कौर भारद्वाज भी मौके पर पहुंचे।
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि बीच-बचाव करने पहुंचे परिजनों को भी घेर लिया गया और उनके साथ मारपीट की गई। घटना में न्यायाधीश की शर्ट के बटन टूटने, पत्नी के दाहिने हाथ के पास चोट आने और साले अभिषेक भारद्वाज के सिर, सीने तथा गले में चोट लगने की बात सामने आई है। पत्नी और साले का चश्मा छीने जाने की शिकायत भी की गई है।
मामला दर्ज, लेकिन दूसरे पक्ष की शिकायत से आया नया मोड़
इस पूरे घटनाक्रम में एक महत्वपूर्ण मोड़ तब आया जब जन्मदिन की पार्टी में शामिल विनय वैद्य की ओर से भी सरकंडा थाने में शिकायत दर्ज कराई गई।
दूसरे पक्ष का आरोप है कि पटाखे फोड़ने को लेकर विवाद शुरू हुआ था। विनय वैद्य ने अपनी शिकायत में न्यायाधीश, उनकी पत्नी और साले पर मारपीट करने तथा कार चढ़ाकर जान से मारने की धमकी देने का आरोप लगाया है।
इस तरह एक ही घटना को लेकर दोनों पक्षों ने एक-दूसरे के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है। पुलिस ने दोनों पक्षों की शिकायतों पर काउंटर FIR दर्ज की है। इसलिए मामले में किसी एक पक्ष के आरोपों को अंतिम सत्य मानना उचित नहीं होगा। घटना का वास्तविक क्रम और किसकी क्या भूमिका रही, यह पुलिस जांच के बाद ही स्पष्ट होगा।
सरकंडा पुलिस ने इन धाराओं में दर्ज किया अपराध
न्यायाधीश प्रफुल्ल कुमार सोनवानी की शिकायत पर अभय बरुआ एवं अन्य के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की निम्न धाराओं के तहत अपराध दर्ज किया गया है:
- धारा 115(2) – स्वेच्छा से चोट पहुंचाने से संबंधित।
- धारा 296 – अश्लील कृत्य एवं अश्लील शब्दों के प्रयोग से संबंधित।
- धारा 3(5) – समान आशय से कई व्यक्तियों द्वारा किया गया आपराधिक कृत्य।
- धारा 351(3) – गंभीर आपराधिक धमकी से संबंधित।
दूसरे पक्ष की शिकायत पर भी तीन लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किए जाने की जानकारी सामने आई है।
न्यायधानी में सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
बिलासपुर को न्यायधानी कहा जाता है। यहां न्यायालय, न्यायिक अधिकारी और कानून व्यवस्था से जुड़े संस्थानों की मौजूदगी शहर की एक अलग पहचान है। ऐसे शहर में देर रात जन्मदिन की पार्टी के दौरान सैकड़ों लोगों की भीड़, पटाखों और नगाड़ों के शोर तथा मारपीट के आरोप सामने आना कई सवाल खड़े करता है।
क्या आवासीय इलाकों में देर रात तक इस तरह के शोर-शराबे पर प्रभावी निगरानी हो रही है? क्या सार्वजनिक शांति भंग करने वालों पर समय रहते कार्रवाई होती है? और यदि किसी नागरिक द्वारा शोर का विरोध किया जाता है, तो उसकी सुरक्षा की जिम्मेदारी किसकी है?
फिलहाल सरकंडा पुलिस दोनों पक्षों की शिकायतों के आधार पर मामले की जांच कर रही है। घटना से जुड़े वीडियो और अन्य साक्ष्य भी जांच में महत्वपूर्ण हो सकते हैं।
सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब न्यायधानी में एक न्यायिक अधिकारी के परिवार के साथ मारपीट के आरोप सामने आ रहे हैं, तो आम नागरिक अपनी सुरक्षा को लेकर किससे उम्मीद करे?






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