बिलासपुर: छठ घाट पर महापर्व की तैयारियां शुरू, पूजा कार्यालय का हुआ शुभारंभ; अध्यक्ष प्रवीण झा बोले- इस बार भी होगा भव्य आयोजन
अरपा नदी के तट पर सजेगा आस्था का महापर्व, 13 नवंबर से शुरू होंगे चार दिवसीय अनुष्ठान; 15 नवंबर को अस्ताचलगामी और 16 नवंबर को उदीयमान सूर्य को दिया जाएगा अर्घ्य
बिलासपुर। लोक आस्था के महापर्व छठ पूजा को लेकर न्यायधानी बिलासपुर में तैयारियां तेज हो गई हैं। तोरवा स्थित अरपा नदी के तट पर बने छठ घाट में इस वर्ष भी भव्य आयोजन की तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। इसी कड़ी में रविवार को छठ पूजा समिति की ओर से घाट परिसर में पूजा कार्यालय का विधिवत शुभारंभ किया गया। कार्यालय शुरू होने के साथ ही पर्व के आयोजन, श्रद्धालुओं की सुविधाओं और व्यवस्थाओं को लेकर तैयारियों ने गति पकड़ ली है।
छठ पूजा समिति के अध्यक्ष प्रवीण झा ने कहा कि हर वर्ष की तरह इस बार भी छठ महापर्व पूरे उत्साह, श्रद्धा और भव्यता के साथ मनाया जाएगा। समिति का प्रयास रहेगा कि घाट पर पहुंचने वाले व्रती परिवारों और श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं मिलें तथा पूजा के दौरान किसी प्रकार की असुविधा न हो। उन्होंने बताया कि पर्व में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है। इसे देखते हुए आयोजन से जुड़ी व्यवस्थाओं को समय रहते पूरा किया जा रहा है।
चार दिनों तक चलेंगे छठ महापर्व के अनुष्ठान
इस वर्ष छठ महापर्व की शुरुआत 13 नवंबर से होगी। चार दिनों तक चलने वाले इस पर्व में प्रत्येक दिन का अपना विशेष धार्मिक और पारंपरिक महत्व है।
- 13 नवंबर: नहाय-खाय के साथ महापर्व का शुभारंभ।
- 14 नवंबर: खरना का अनुष्ठान।
- 15 नवंबर: अस्ताचलगामी सूर्य को संध्या अर्घ्य।
- 16 नवंबर: उदीयमान सूर्य को प्रातः अर्घ्य देने के साथ व्रत का समापन।
इस दौरान व्रती महिलाएं और पुरुष परिवार की सुख-समृद्धि, संतान की खुशहाली और आरोग्य की कामना के साथ कठिन व्रत रखते हैं। खरना के बाद निर्जला उपवास शुरू होता है। व्रती नदी और जलाशयों में खड़े होकर अस्त होते सूर्य को अर्घ्य देते हैं और अगले दिन उगते सूर्य को अर्घ्य अर्पित कर व्रत का पारण करते हैं।
देशभर में पहचान बना चुका है तोरवा का छठ घाट
अरपा नदी के तट पर स्थित तोरवा छठ घाट बिलासपुर में छठ महापर्व के आयोजन का प्रमुख केंद्र बन चुका है। विशाल परिसर, स्थायी पूजा बेदियों और श्रद्धालुओं के लिए उपलब्ध स्थान के कारण इस घाट की अलग पहचान है। हर साल छठ पूजा के अवसर पर यहां बड़ी संख्या में व्रती परिवार और श्रद्धालु एकत्रित होते हैं।
छत्तीसगढ़ के अलावा बिहार, झारखंड और उत्तर प्रदेश की परंपराओं से जुड़े परिवार भी यहां सामूहिक रूप से छठ महापर्व मनाने पहुंचते हैं। घाट पर होने वाला यह सामूहिक आयोजन अब बिलासपुर की सांस्कृतिक और धार्मिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा बन गया है।
सूर्य उपासना और लोक आस्था का प्रतीक है छठ पर्व
छठ पूजा प्रकृति, सूर्य देव और छठी मैया की उपासना का महापर्व है। इस पर्व में स्वच्छता, पवित्रता, अनुशासन और श्रद्धा का विशेष महत्व होता है। व्रती कठिन नियमों का पालन करते हुए परिवार की खुशहाली और आरोग्य की कामना करते हैं।
तोरवा छठ घाट पर पूजा कार्यालय के शुभारंभ के साथ ही इस वर्ष के आयोजन की औपचारिक तैयारियां शुरू हो चुकी हैं। समिति का लक्ष्य श्रद्धालुओं के लिए व्यवस्थित, स्वच्छ और सुविधाजनक वातावरण तैयार करना है, ताकि सभी लोग श्रद्धा और उल्लास के साथ महापर्व मना सकें।






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