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"सी ओ हाज़िर हो” अभियान से अंचल कार्यालयों में ख़त्म होगा भ्रष्टाचार- जय झारखंड अभियान



बाघमारा अंचल में बिचौलियों व दलालों का है दबदबा, जमकर होता है भ्रष्टाचार- छेदी कुमार
कतरास: शनिवार को प्रेस क्लब राँची में “जय झारखण्ड अभियान” द्वारा लीडर्स मिलन का आयोजन किया गया. इस आयोजन में राज्य के अंचल कार्यालयों में व्याप्त भ्रष्टाचार और आम नागरिकों के क़ानूनी अधिकार के मुद्दे पर मुख्य रूप से चर्चा किया गया. आयोजकों में बताया कि राज्य के अंचल कार्यालयों में व्याप्त भ्रष्टाचार से राज्य का प्रत्येक परिवार किसी न किसी रूप से प्रभावित है और अपने वाजिब काम कराने के लिए भी दलाल अथवा बिचौलिया के पास जाने को मजबूर है. अंचल अधिकारियों की मिलीभगत से खतियान के जल, जंगल और जमीन गायब हो रहे. जाली दस्तावेजों और फर्जीवाड़ा का सहारा लेकर सरकारी जमीन का  कागज़ भी जमीन माफिया के नाम पर बनाये जा रहे हैं. आम नागरिक जीवन भर की बचत से घर बनाने के लिए थोड़ी सी जमीन खरीदता है लेकिन दाखिल- खारिज कराने में उनके पसीने छूट जाते हैं. युवाओ के जाति प्रमाण-पत्र, आवासीय प्रमाण-पत्र और आय प्रमाण-पत्र समय पर नहीं बनते हैं, परिणाम स्वरूप कई युवकों को नौकरी पाने से वंचित रहना पड़ रहा है. अंचल अधिकारी और आम नागरिक के सीधे संवाद के रास्ते बंद हैं और इसी बंद रास्ते को खोलने के लिए संगठन द्वारा राज्यव्यापी कार्यक्रम "सी. ओ. हाजिर हो" अभियान चलाएगा। कतरास के जाने माने वरिष्ठ आरटीआई कार्यकर्ता सह अधिवक्ता छेदी कुमार ने बताया कि सरकारी आदेश के अनुसार अंचल अधिकारियों को अपने कार्यक्षेत्र में प्रति वर्ष 120 दिन राजस्व ग्रामों का दौरा करना है. और बैठकों के दौरान आए मामलों को "विलेज नोट बुक" में दर्ज किए जाने का प्रावधान है। नियम के अनुसार जिले के उपायुक्त, अपर समाहर्ता, भूमि सुधार उप-समाहर्ता और अनुमंडल पदाधिकारियों को अंचल कार्यालयों का समय-समय पर निरीक्षण करना है. 


बाघमारा अंचल सह प्रखण्ड कार्यालय में बिचौलियों व दलालों का है दबदबा- छेदी कुमार
वहीं उन्होंने बाघमारा अंचल सह प्रखण्ड कार्यालय में भ्रष्टाचार होने की बात कही. कहा कि  बाघमारा के लोगों को जमीन संबंधित कार्यों के लिए बिचौलियों और दलालों का सहारा लेना पड़ता है जिसके लिए उसे बहुत पैसे देने होते हैं. बिना पैसा दिए बाघमारा अंचल कार्यालय में कोई भी कार्य नही होता है. प्रखण्ड कार्यालय बाघमारा में भी सरकारी जनकल्याणकारी योजनाओं में जमकर भ्रष्टाचार होता है. मुख्य संयोजक अधिवक्ता सुनील महतो जी ने बताया कि सरकारी आदेश का पालन न करना भारतीय न्याय संहिता के अंतर्गत अपराध है और ऐसे अंचल अधिकारियों के खिलाफ मुक़दमा दर्ज कराने की कार्रवाई की जाएगी. कार्यक्रम के पश्चात कुछ प्रस्ताव पारित हुए जिसमें उपस्थित सदस्यों को ज़िला स्तर पर संयोजक समिति गठित करने की सहमति बनी. ये संयोजक समिति राज्य के सभी ज़िलों के उपायुक्त को इस संबंध में माँगपत्र सौंपने और अंचल अधिकारी के सेवा कर्तव्य नियमावली के पालन की सुनिश्चितता तय कराने का काम करेंगे. लीडर्स मीट के कार्यक्रम में झारखण्ड उच्च न्यायालय के अधिवक्ता विनोद सिंह अधिवक्ता योगेन्द्र प्रसाद, बिमल अरविंद, विशाल सिन्हा, संतोष महतो, विक्की कुमार, एस अली, आनंद किशोर पाण्डा, अधिवक्ता छेदी कुमार, बबलू महतो, अनूप कुमार, टेकलाल महतो, बसंत कुमार, कमलेश महतो, सरफराज अंसारी, बोनेया महतो, जियाउल हक़, रेहान अंसारी, गौतम कुमार, उदय, राजेश कुमार, किशन गंझु, सुलभ मिश्रा सहित 18 ज़िले के प्रतिनिधि शामिल हुए.

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