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धनबाद बना रणक्षेत्र: मॉल में सांसद और कांग्रेस नेता के समर्थकों की भिड़ंत, लाठीचार्ज – कानून व्यवस्था पर उठे सवाल

धनबाद बना रणक्षेत्र: मॉल में सांसद और कांग्रेस नेता के समर्थकों की भिड़ंत, लाठीचार्ज – कानून व्यवस्था पर उठे सवाल

धनबाद, झारखंड: कोयला राजधानी धनबाद शुक्रवार को एक बार फिर तनाव और अफरातफरी का गवाह बना। प्रभातम मॉल परिसर में भाजपा सांसद ढुलू महतो और कांग्रेस नेता सह मजदूर नेता रणविजय सिंह के समर्थकों के बीच तीखी झड़प हो गई। देखते ही देखते माहौल इतना बिगड़ गया कि पूरा इलाका रणक्षेत्र में बदल गया। पुलिस को लाठीचार्ज कर भीड़ को तितर-बितर करना पड़ा और तीन लोगों को हिरासत में लिया गया। हालांकि किसी के गंभीर रूप से घायल होने की सूचना नहीं है, पर पूरे क्षेत्र में तनावपूर्ण स्थिति बनी हुई है और मॉल को अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया है।

पार्किंग विवाद से शुरू, सोशल मीडिया से तूल पकड़ा

कुछ दिन पहले दोनों गुटों में वाहन पार्किंग को लेकर कहासुनी हुई थी। इस घटना के बाद दोनों पक्षों के बीच सोशल मीडिया पर जमकर बयानबाजी और अभद्र भाषा का प्रयोग हुआ। लगातार एक-दूसरे को नीचा दिखाने और धमकाने वाले पोस्ट वायरल होते रहे। बावजूद इसके, प्रशासन मूकदर्शक बना रहा।

शुक्रवार को प्रभातम मॉल के बाहर दोनों गुटों के समर्थक आमने-सामने आ गए। शुरुआत कहासुनी से हुई, फिर नारेबाजी और अंत में धक्का-मुक्की व मारपीट तक बात पहुंच गई। सूचना मिलते ही बरवाअड्डा, भूली और धनबाद थाने की पुलिस मौके पर पहुंची। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए सिटी एसपी ऋत्विक श्रीवास्तव, डीएसपी मुख्यालय शंकर कामती और डीएसपी (लॉ एंड ऑर्डर) नौशाद आलम ने मौके पर मोर्चा संभाला।

पुलिस का लाठीचार्ज और कार्रवाई

पुलिस ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए लाठीचार्ज किया और मॉल परिसर से भीड़ को खदेड़ दिया। डीएसपी नौशाद आलम ने बताया कि झड़प की सूचना मॉल प्रबंधन द्वारा दी गई थी, जिस पर तत्काल कार्रवाई करते हुए तीन लोगों को हिरासत में लिया गया है। उनसे पूछताछ की जा रही है। डीएसपी ने सख्त लहजे में कहा कि कोई भी व्यक्ति अगर कानून व्यवस्था को चुनौती देगा, तो उस पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

कानून व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल...??

इस पूरी घटना ने धनबाद की कानून व्यवस्था पर गहरी चिंता खड़ी कर दी है:

जब पहले ही इसी मॉल में विवाद हो चुका था, तो पुलिस ने एहतियात क्यों नहीं बरता?

सोशल मीडिया पर अभद्र भाषा और गाली-गलौज करने वालों पर साइबर सेल क्यों चुप रही?

क्या साइबर सेल सिर्फ आम नागरिकों पर कार्रवाई करती है और नेताओं के समर्थकों को छूट दी जाती है?

क्या प्रशासन राजनीतिक दबाव या पैसे के प्रभाव में कार्य कर रहा है?

धनबाद को चाहिए जवाब

धनबाद एक औद्योगिक और संवेदनशील जिला है। इस प्रकार की घटनाएं सिर्फ शहर की छवि खराब नहीं करतीं, बल्कि आम नागरिकों के मन में असुरक्षा का भाव भी पैदा करती हैं। अगर प्रशासन अब भी नहीं चेता, तो यह शहर नेताओं और उनके समर्थकों का अखाड़ा बन जाएगा। 




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