कानून के नाम पर धंधा — अवैध सिलेंडर कारोबार का बड़ा खुलासा
दुलाल मुखर्जी POWER NEWS 24 BHARAT
बिलासपुर के तोरवा क्षेत्र से एक बार फिर प्रशासनिक लापरवाही और भ्रष्ट तंत्र की सच्चाई उजागर हुई है। पुलिस ने यहाँ एक मकान से 80 से ज़्यादा घरेलू और कमर्शियल गैस सिलेंडर बरामद किए हैं। इनमें उज्ज्वला योजना के सिलेंडर भी शामिल हैं, जिन्हें गरीब परिवारों के लिए सरकार द्वारा जारी किया गया था — लेकिन यहाँ इनका इस्तेमाल मुनाफाखोरी और अवैध व्यापार में किया जा रहा था।
यह पूरा नेटवर्क लंबे समय से खाद्य विभाग के कुछ अधिकारियों की मिलीभगत से चल रहा था। सूत्रों के मुताबिक, यह सिलेंडर रेलवे क्षेत्र, होटलों और अन्य प्रतिष्ठानों में ऊँचे दामों पर सप्लाई किए जाते थे।
पुलिस ने कार्रवाई में दो आरोपियों सुनील थारवानी और अजय मेघानी को हिरासत में लिया है। जब पुलिस ने छापा मारा, तो बुधवारी बाजार व्यापारी संघ और कुछ राजनीतिक व्यक्तियों ने मौके पर दबाव बनाने की कोशिश की — लेकिन थाना प्रभारी अभय सिंह बैस ने किसी की भी बात नहीं मानी और कार्रवाई पूरी की।
अब सवाल यह है कि —
क्या ये जनता की सेवा करने वाले विभाग हैं या जनता को लूटने वाले गिरोह?
जहाँ शासन के नियम केवल नाम के लिए बचे हैं, वहीं भ्रष्टाचार की जड़ें इतनी गहरी हो चुकी हैं कि हर स्तर पर रिश्वत और सेटिंग का खेल खुलेआम चल रहा है।
एक तरफ अफसर रिश्वत लेते पकड़े जा रहे हैं,
तो दूसरी तरफ भ्रष्टाचार के आरोप साबित हो रहे हैं।
असलियत यही है कि गोरखधंधे रुकने का नाम नहीं ले रहे।
जनता को राहत देने की जगह, योजनाओं का दुरुपयोग कर ये लोग गरीबों की हक़ की गैस तक बेच खा रहे हैं।
पुलिस अब इस पूरे नेटवर्क के पीछे के बड़े चेहरों की तलाश में जुटी है।
देखना यह है कि क्या इस बार “बड़े नामों” पर भी कार्रवाई होती है या मामला फिर किसी फाइल में दबा दिया जाएगा।




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