आसमा सिटी के असली जेवर के बदले नकली जेवर के मामले में नया मोड़: वसूली गैंग कनेक्शन की चर्चा, प्राथी ने नहीं दिखाया अब तक जेवर का कोई बिल सतीश मिश्रा ने किया दावा 70–80 लाख के जेवर का, जांच में जुटी पुलिस
बिलासपुर (सकरी)। आसमा सिटी में असली जेवर की जगह नकली जेवर रखे जाने और एटीएम से रकम निकासी के मामले में अब बड़ा मोड़ सामने आया है। पहले जहां प्रार्थी सतीश मिश्रा ने पुलिस पर कार्रवाई नहीं करने के आरोप लगाए थे, वहीं अब उभरती जानकारियों ने पूरे घटनाक्रम को नए सवालों के घेरे में ला खड़ा किया है।
सूत्रों के अनुसार, प्रार्थी द्वारा पुलिस तक पहुंचने से पहले कथित रूप से बाहरी लोगों और वसूली गैंग से जुड़े व्यक्तियों की मदद लेने की चर्चा सामने आ रही है। इस कड़ी में शहर के दो युवकों के नाम भी सामने आ रहे हैं, जिनके खिलाफ कोटा थाना में गंभीर धाराओं के तहत मामला दर्ज बताया जा रहा है और वे फिलहाल जेल में निरुद्ध हैं। हालांकि इस संबंध में आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
मामले में यह भी सामने आ रहा है कि घटनाक्रम की शुरुआत से लेकर मीडिया तक पहुंचने के बीच कई स्तरों पर गतिविधियां हुईं। पहले बाहरी मदद लेने, फिर थाना पहुंचने और उसके बाद प्रेस के सामने आने की पूरी प्रक्रिया ने कई नए सवाल खड़े कर दिए हैं।
सूत्रों का दावा है कि जेवर गिरवी रखकर प्राप्त रकम का उपयोग लगातार मौज-मस्ती, दोस्तों के साथ घूमने-फिरने, पार्टियों, नए मोबाइल फोन और कपड़ों की खरीदारी में किया गया। यह सिलसिला कुछ समय तक चलता रहा, जिससे पूरे मामले में पारिवारिक पहलू और गहराता नजर आ रहा है।
इधर, प्रार्थी की ओर से बेटे और उसके दोस्तों के माध्यम से पुलिस पर लगाए गए आरोपों ने भी मामले को और संवेदनशील बना दिया है। इससे यह प्रकरण अब केवल चोरी तक सीमित न रहकर कई पहलुओं में जांच का विषय बन गया है।
इस बीच यह भी जानकारी सामने आई है कि पुलिस द्वारा सतीश मिश्रा को कथन (बयान) के लिए कई बार थाना बुलाया गया, लेकिन वे अब तक उपस्थित नहीं हुए हैं। साथ ही अब तक संबंधित जेवरात के खरीद बिल भी प्रस्तुत नहीं किए गए हैं, जिससे जांच में और जटिलता बनी हुई है।
पुलिस का कहना है कि पूरे मामले की जांच निष्पक्ष तरीके से की जा रही है और सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए तथ्यों के आधार पर कार्रवाई की जाएगी। अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया है कि किसी भी तरह की भ्रामक या अपुष्ट जानकारी से बचना जरूरी है और जांच पूरी होने के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।


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