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बुजुर्ग महिला रोती रही, गर्भवती महिला से मारपीट का आरोप; एसएसपी के संज्ञान में आते ही 3 आरोपी गिरफ्तार, कोनी थाना पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल

बुजुर्ग महिला रोती रही, गर्भवती महिला से मारपीट का आरोप; एसएसपी के संज्ञान में आते ही 3 आरोपी गिरफ्तार, कोनी थाना पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल

बिलासपुर। छोटी कोनी में सामने आया विवाद अब सिर्फ मारपीट की शिकायत तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पुलिस की कार्यप्रणाली को लेकर भी सवाल खड़े हो गए हैं। पीड़ित परिवार की ओर से घर में घुसकर मारपीट, तोड़फोड़, गणेश पंडाल को नुकसान पहुंचाने, जातिगत अपमान और गर्भवती महिला से मारपीट जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं। मामले से जुड़ा वीडियो भी सामने आया है, जिसमें एक बुजुर्ग महिला रोते हुए अपनी आपबीती बताती नजर आ रही है। शिकायतकर्ता संतोषी नेताम की ओर से राम विलास साहू, दिलीप साहू, दीपक साहू, केदार साहू समेत अन्य लोगों के खिलाफ शिकायत किए जाने की जानकारी सामने आई है। पीड़ित पक्ष का आरोप है कि विवाद के दौरान महिलाओं और परिवार के अन्य सदस्यों के साथ मारपीट की गई। वहीं, गर्भवती महिला से कथित मारपीट के आरोप ने मामले की गंभीरता और बढ़ा दी है। पीड़ित परिवार का कहना है कि घटना के बाद उन्होंने पुलिस से शिकायत कर कार्रवाई और सुरक्षा की मांग की, लेकिन थाना स्तर पर कार्रवाई को लेकर उन्हें इंतजार करना पड़ा। इसी को लेकर अब सबसे बड़ा सवाल कोनी थाना प्रभारी की कार्यप्रणाली को लेकर उठ रहा है। जब शिकायत में बुजुर्ग महिला, महिलाओं और गर्भवती महिला के साथ कथित मारपीट जैसे आरोप सामने आए, तो शुरुआती स्तर पर पुलिस ने उतनी तत्परता क्यों नहीं दिखाई, जितनी बाद में दिखाई गई? बताया जा रहा है कि मामला वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक रजनेश सिंह के संज्ञान में पहुंचने के बाद पुलिस कार्रवाई में तेजी आई। इसके बाद मामले में तीन आरोपियों की गिरफ्तारी की गई। साथ ही प्रकरण में SC/ST एक्ट की धाराएं जोड़े जाने की जानकारी सामने आई है। ऐसे में सवाल यह भी उठ रहा है कि यदि वरिष्ठ अधिकारी के संज्ञान में आने के बाद कुछ ही समय में कार्रवाई आगे बढ़ सकती है, तो थाना स्तर पर शिकायत मिलने के बाद यही गंभीरता पहले क्यों नहीं दिखाई गई?

हालांकि, यह स्पष्ट करना जरूरी है कि शिकायत में लगाए गए आरोपों और पुलिस कार्रवाई की परिस्थितियों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। SC/ST एक्ट की धाराएं किन तथ्यों और जांच के आधार पर जोड़ी गईं, यह पुलिस की विवेचना से स्पष्ट होगा। गिरफ्तार किए गए आरोपियों की भूमिका का अंतिम निर्धारण भी न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगा।

इस पूरे मामले ने पुलिस की जवाबदेही को लेकर एक बड़ा सवाल जरूर खड़ा किया है—क्या पीड़ित की आवाज वरिष्ठ अधिकारी तक पहुंचने के बाद ही पुलिस कार्रवाई में तेजी आएगी, या थाना स्तर पर ही हर गंभीर शिकायत को उसी संवेदनशीलता और तत्परता के साथ लिया जाएगा? एक तरफ बुजुर्ग महिला के आंसू, दूसरी तरफ गर्भवती महिला से मारपीट के आरोप, और बीच में न्याय व सुरक्षा की गुहार लगाता परिवार—ऐसे मामलों में पुलिस की शुरुआती कार्रवाई और शिकायत पर की गई प्रक्रिया बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है। अब देखना होगा कि जांच में घटना की वास्तविकता क्या सामने आती है और पुलिस आगे इस मामले में क्या कार्रवाई करती है। फिलहाल तीन आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद मामला जांच के दायरे में है। अब निगाह इस बात पर है कि पुलिस विवेचना में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे कौन-कौन सी कानूनी कार्रवाई की जाती है और थाना स्तर पर उठे सवालों का जवाब पुलिस प्रशासन किस तरह देता है। 

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