सकरी थाना मामले में नया मोड़: कथित लेनदेन से मामले के निपटारे का सवाल, VIDEO में युवक बोला- “10 हजार मांगा था, 7500 दिया हूं”
बिलासपुर। सकरी थाना क्षेत्र में महिला से संबंधित शिकायत और पुलिस की कार्रवाई को लेकर सामने आए घटनाक्रम में अब नया मोड़ आया है। कल प्रकाशित खबर में शिकायत के बाद दिनभर चली पूछताछ और शाम को प्रार्थी द्वारा लिखित रूप से “कार्रवाई नहीं चाहिए” कहे जाने का मामला सामने रखा गया था। अब इसी प्रकरण से जुड़ा बताया जा रहा एक वीडियो सामने आया है, जिसमें एक युवक से पैसों को लेकर सवाल किया गया है।
वीडियो में जब युवक से पूछा जाता है—“कितना दिए हो?” तो युवक जवाब देता है—“10 हजार मांगा था, 7500 दिया हूं।"
युवक के इस बयान के बाद अब मामले में कथित लेनदेन के जरिए निपटारे को लेकर सवाल उठने लगे हैं। हालांकि, वीडियो में युवक द्वारा कही गई बात को फिलहाल उसका बयान ही माना जा सकता है। इस कथन की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।
कल की खबर में सामने आया था पूरा घटनाक्रम
दरअसल, इस मामले में प्रार्थी द्वारा सकरी थाने में शिकायत दिए जाने की जानकारी सामने आई थी। शिकायत के बाद संबंधित युवक को थाने बुलाया गया और शिकायत से जुड़े तथ्यों को लेकर पूछताछ किए जाने की बात सामने आई।
बताया गया कि युवक सुबह से थाना परिसर में मौजूद था और पुलिस द्वारा मामले से संबंधित जानकारी ली जा रही थी। इसके बाद शाम को प्रार्थी की ओर से लिखित आवेदन दिए जाने की बात सामने आई, जिसमें किसी प्रकार की आगे की कार्रवाई नहीं चाहने की बात कही गई। इसी घटनाक्रम को लेकर कल सवाल उठाया गया था कि शिकायत मिलने के बाद दिनभर चली पूछताछ और जांच की प्रक्रिया का आधिकारिक निष्कर्ष क्या रहा तथा शिकायतकर्ता के बाद में कार्रवाई नहीं चाहने के पीछे क्या परिस्थितियां थीं।
अब युवक के बयान से उठे नए सवाल
अब सामने आए वीडियो में युवक द्वारा “10 हजार मांगा था, 7500 दिया हूं” कहे जाने के बाद पूरे मामले में एक नया सवाल जुड़ गया है।
वीडियो में सवाल पूछने वाला व्यक्ति युवक से राशि के संबंध में जानकारी लेता है और युवक कथित तौर पर ₹10 हजार मांगे जाने तथा ₹7,500 दिए जाने की बात कहता है।
ऐसे में सवाल उठता है कि यदि युवक का बयान सही है तो ₹10 हजार की कथित मांग किसने की थी, ₹7,500 किसे दिए गए और इस राशि का शिकायत से क्या संबंध था? साथ ही यह भी स्पष्ट होना जरूरी है कि क्या वास्तव में इस कथित राशि के लेनदेन के बाद मामले को आगे नहीं बढ़ाया गया या दोनों घटनाओं का आपस में कोई संबंध नहीं है।
जांच के बाद ही सामने आएगी वास्तविक स्थिति
इस पूरे मामले में यह स्पष्ट करना जरूरी है कि वीडियो में युवक द्वारा कही गई बात की स्वतंत्र पुष्टि फिलहाल नहीं हुई है। केवल किसी व्यक्ति के बयान के आधार पर किसी पुलिसकर्मी, अधिकारी या अन्य व्यक्ति को दोषी ठहराना उचित नहीं होगा। कथित रूप से ₹10 हजार की मांग, ₹7,500 दिए जाने की बात, राशि का वास्तविक लेनदेन, पैसा किसे दिया गया और उसका इस मामले से क्या संबंध है—इन सभी तथ्यों की वास्तविकता निष्पक्ष जांच, उपलब्ध साक्ष्यों और संबंधित पक्षों के बयानों के बाद ही स्पष्ट हो पाएगी। इसी तरह यह भी जांच का विषय होगा कि शिकायतकर्ता ने शाम को लिखित रूप से कार्रवाई नहीं चाहने का आवेदन किन परिस्थितियों में दिया और पुलिस ने उस आवेदन के बाद मामले में क्या प्रक्रिया अपनाई।
पुलिस का आधिकारिक पक्ष भी महत्वपूर्ण
अब पूरे मामले में पुलिस का आधिकारिक पक्ष सामने आना भी महत्वपूर्ण है। पुलिस की ओर से यह स्पष्ट किया जाना जरूरी है कि युवक को किस शिकायत के आधार पर थाने बुलाया गया था, दिनभर किस प्रकार की पूछताछ हुई, शिकायतकर्ता के कार्रवाई नहीं चाहने वाले आवेदन के बाद क्या प्रक्रिया अपनाई गई और वीडियो में लगाए गए पैसों से संबंधित आरोपों पर पुलिस का क्या कहना है। यदि जांच में किसी प्रकार के लेनदेन या अनियमितता के आरोप सही पाए जाते हैं तो उसके अनुसार कार्रवाई का प्रश्न उठेगा। वहीं यदि आरोपों की पुष्टि नहीं होती है तो वास्तविक स्थिति भी जांच के माध्यम से सामने आ जाएगी।
सवाल अभी बाकी हैं
फिलहाल इस पूरे घटनाक्रम में तीन प्रमुख बातें सामने हैं—पहली, शिकायत के बाद युवक को थाने बुलाकर पूछताछ किए जाने की बात; दूसरी, शाम को शिकायतकर्ता द्वारा “कार्रवाई नहीं चाहिए” लिखकर देने की बात; और तीसरी, अब सामने आया युवक का वीडियो, जिसमें वह “10 हजार मांगा था, 7500 दिया हूं” कह रहा है।
इन घटनाओं के बीच वास्तविक संबंध क्या है, क्या कथित राशि का कोई लेनदेन हुआ था और यदि हुआ तो उसका मामले के निपटारे से कोई संबंध था या नहीं—यह जांच के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा।
POWER NEWS 24 BHARAT के पास संबंधित वीडियो सुरक्षित है। वीडियो में कही गई बातों को चैनल द्वारा अंतिम निष्कर्ष के रूप में प्रस्तुत नहीं किया जा रहा है। मामले की वास्तविक स्थिति संबंधित पक्षों के बयान, उपलब्ध साक्ष्यों और निष्पक्ष जांच के निष्कर्ष के बाद ही स्पष्ट होगी।



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