CG News: बिलासपुर के 155 साल पुराने राम-जानकी मंदिर की परंपरा में बदलाव, वहीं 140 साल पुराने नारियलधारी हनुमान मंदिर में भी उमड़ती है भक्तों की भीड़
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर शहर की पहचान केवल ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत से ही नहीं, बल्कि अपनी अनूठी धार्मिक परंपराओं से भी है। शहर में एक ओर हटरी चौक स्थित करीब 155 साल पुराना श्रीराम-सीता-हनुमान मंदिर है, जिसके पट साल में केवल दशहरे के दिन खुलते हैं, तो दूसरी ओर जूना बिलासपुर में करीब 140 साल पुराना दक्षिणमुखी हनुमान मंदिर है। इस मंदिर में बजरंगबली की हाथों में नारियल धारण किए हुए अनोखी प्रतिमा विराजमान है, जिसे प्रदेश की एकमात्र ऐसी प्रतिमा बताया जाता है।
155 साल पुराना राम-जानकी मंदिर: दशहरे पर ही होते हैं दर्शन
हटरी चौक स्थित श्रीराम-सीता-हनुमान मंदिर में वर्षों से विजयादशमी के दिन ही श्रद्धालुओं को दर्शन का अवसर मिलता रहा है। परंपरा के अनुसार, मंदिर के पट साल में एक बार खोले जाते हैं। इस वर्ष मंदिर के पट खोलने के समय में बदलाव किया गया है। पहले जहां श्रद्धालु शाम 4 बजे से रात 9 बजे तक दर्शन कर पाते थे, वहीं इस बार सुबह 7 बजे से शाम 4 बजे तक दर्शन की व्यवस्था रखी गई है। मंदिर की देखरेख करने वाली अमिता पांडेय का करीब तीन महीने पहले निधन हो गया था। इसके बाद मंदिर परिवार ने इस वर्ष व्यवस्थाओं में बदलाव करने का निर्णय लिया। अब मंदिर की देखरेख और सेवा की जिम्मेदारी हरिश्चंद्र पांडेय और दिनेशचंद्र पांडेय संभालेंगे।
इस बार मनोकामना नारियल बांधने और खोलने पर भी रोक
इस वर्ष श्रद्धालु मंदिर में मनोकामना नारियल नहीं बांध सकेंगे। जिन भक्तों की मन्नतें पूरी हो चुकी हैं, उन्हें भी पुराने नारियल खोलने का अवसर नहीं मिलेगा। इसके अलावा फूल, नारियल और पत्तियां चढ़ाने की अनुमति भी नहीं होगी।
मंदिर से जुड़े सेवादार बुद्धेश्वर शर्मा (सीटू) के अनुसार, मंदिर में करीब 800 मनोकामना नारियल बंधे हुए हैं। पिछले वर्ष 260 श्रद्धालुओं ने अपनी मन्नत पूरी होने पर नारियल खोले थे, जबकि 115 श्रद्धालुओं ने नए नारियल बांधे थे। मंदिर परिवार के अनुसार, अगले वर्ष पुरानी परंपराएं फिर शुरू होने की संभावना है।
जूना बिलासपुर का 140 साल पुराना नारियलधारी हनुमान मंदिर
बिलासपुर के जूना बिलासपुर में स्थित दक्षिणमुखी हनुमान मंदिर भी अपनी विशिष्ट पहचान रखता है। करीब 140 वर्ष पुराने इस मंदिर में बजरंगबली की ऐसी प्रतिमा विराजमान है, जिसमें वे हाथों में नारियल धारण किए हुए हैं। मंदिर से जुड़ी मान्यता के अनुसार, इस तरह की प्रतिमा प्रदेश में अन्यत्र देखने को नहीं मिलती। मंदिर के पुजारी मनीष पांडेय बताते हैं कि बजरंगबली के प्रति श्रद्धालुओं की गहरी आस्था है। प्रत्येक मंगलवार को मंदिर में भक्तों की काफी भीड़ उमड़ती है। श्रद्धालु यहां पहुंचकर पूजा-अर्चना करते हैं और अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए प्रार्थना करते हैं।
लंका में माता सीता की खोज से जुड़ी है मान्यता
मंदिर से जुड़ी धार्मिक मान्यता के अनुसार, जब रावण माता सीता का हरण कर उन्हें लंका ले गया था, तब हनुमान जी उनकी खोज में लंका पहुंचे थे। मान्यता है कि वहां दक्षिण दिशा में हाथों में नारियल धारण कर हनुमान जी ने भगवान श्रीराम का स्मरण किया था। मंदिर में स्थापित प्रतिमा को इसी स्वरूप से जोड़कर देखा जाता है।
हनुमान जयंती पर होते हैं विशेष आयोजन
मंदिर में हनुमान जयंती के अवसर पर विशेष धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, हनुमान जयंती पर सुबह 7 बजे से भक्तों के पहुंचने का सिलसिला शुरू होता है। सुबह से ही रुद्राभिषेक, जलाभिषेक और अन्य धार्मिक अनुष्ठान किए जाते हैं। पूरे दिन मंदिर परिसर में मेले जैसा माहौल रहता है और देर शाम तक धार्मिक आयोजन चलते हैं। इस अवसर पर विशाल भंडारे का आयोजन भी किया जाता है।
बिलासपुर की धार्मिक विरासत, आस्था के दो अनूठे केंद्र
बिलासपुर के ये दोनों मंदिर अपनी अलग-अलग परंपराओं के कारण श्रद्धालुओं के बीच विशेष स्थान रखते हैं। एक मंदिर में साल में केवल दशहरे के दिन दर्शन की परंपरा है, तो दूसरे मंदिर में हाथों में नारियल धारण किए दक्षिणमुखी हनुमान जी की अनोखी प्रतिमा भक्तों की आस्था का केंद्र है। इन मंदिरों से जुड़ी मान्यताएं और परंपराएं बिलासपुर की धार्मिक-सांस्कृतिक विरासत को विशिष्ट पहचान देती हैं। यहां हर वर्ष बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचकर पूजा-अर्चना करते हैं और भगवान का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।




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