बिलासपुर पुलिस ग्राउंड में रावण दहन के दौरान जोरदार विस्फोट, दो पत्रकार झुलसे; पत्रकारों के लिए सुरक्षित कवरेज स्थल नहीं होने पर उठे सवाल
रिमोट से रावण दहन शुरू होते ही आतिशबाजी में हुआ धमाका, मंच के पास मची अफरा-तफरी; विधायक अमर अग्रवाल और महापौर पूजा विधानी सहित हजारों लोग थे मौजूद, सुरक्षा व्यवस्था की जांच की मांग
बिलासपुर। न्यायधानी बिलासपुर के पुलिस परेड ग्राउंड में विजयादशमी के अवसर पर आयोजित रावण दहन कार्यक्रम के दौरान आतिशबाजी में अचानक जोरदार विस्फोट होने से अफरा-तफरी मच गई। रिमोट कंट्रोल के जरिए रावण दहन शुरू होते ही हुए धमाके के बीच कार्यक्रम की कवरेज कर रहे दो पत्रकार झुलसकर घायल हो गए। घटना के बाद आयोजन स्थल पर सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। इसके साथ ही पत्रकारों के लिए व्यवस्थित और सुरक्षित कवरेज स्थल नहीं बनाए जाने का मुद्दा भी सामने आया है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, इस घटना में ग्रैंड गुम्बर्र न्यूज के पत्रकार राकेश मिश्रा और खबर भारत न्यूज के पत्रकार शेख असलम मामूली रूप से झुलस गए। दोनों की स्थिति सामान्य बताई गई है। हालांकि, घटना के वास्तविक कारणों और अन्य संभावित घायलों के संबंध में आधिकारिक पुष्टि होना बाकी है।
आतिशबाजी में विस्फोट से मची अफरा-तफरी
घटना के समय पुलिस परेड ग्राउंड में हजारों की संख्या में लोग रावण दहन देखने पहुंचे थे। कार्यक्रम में बिलासपुर विधायक अमर अग्रवाल, महापौर पूजा विधानी सहित अन्य जनप्रतिनिधि, अधिकारी और गणमान्य नागरिक मौजूद थे। जैसे ही रिमोट कंट्रोल के जरिए रावण दहन की प्रक्रिया शुरू हुई, आतिशबाजी के दौरान जोरदार धमाका हुआ। अचानक उठे धुएं और तेज आवाज से मंच के आसपास मौजूद लोगों में हड़कंप मच गया। रावण दहन जैसे बड़े सार्वजनिक आयोजन में इस तरह की घटना ने लोगों को चिंता में डाल दिया। राहत की बात यह रही कि प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक मंच पर मौजूद प्रमुख अतिथियों को कोई गंभीर चोट नहीं आई। लेकिन यदि विस्फोट की चपेट में अधिक लोग आ जाते, तो परिणाम कहीं ज्यादा गंभीर हो सकते थे।
पत्रकारों के लिए सुरक्षित कवरेज स्थल नहीं होना गंभीर चिंता
इस घटना का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि कार्यक्रम की कवरेज करने पहुंचे पत्रकारों के लिए व्यवस्थित, निर्धारित और सुरक्षित स्थान की व्यवस्था नहीं होने का मुद्दा सामने आया है। पत्रकार समाचार संकलन, फोटो और वीडियो रिकॉर्डिंग के लिए मंच के नजदीक पहुंचते हैं। ऐसे में यदि उनके लिए अलग से सुरक्षित कवरेज जोन निर्धारित नहीं किया जाता, तो आतिशबाजी या किसी अन्य अप्रत्याशित घटना के दौरान उनकी जान जोखिम में पड़ सकती है। लोकतंत्र में मीडिया की भूमिका महत्वपूर्ण है। पत्रकार सार्वजनिक आयोजनों की खबरें आम लोगों तक पहुंचाने के लिए मौके पर मौजूद रहते हैं। ऐसे आयोजनों में उनकी सुरक्षा को भी आयोजन प्रबंधन का आवश्यक हिस्सा माना जाना चाहिए। पत्रकारों को केवल कवरेज करने के लिए आमंत्रित करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनके लिए ऐसी जगह सुनिश्चित करना भी जरूरी है, जहां से वे सुरक्षित दूरी बनाए रखते हुए अपना काम कर सकें।
इस घटना ने सवाल खड़ा किया है कि जब आयोजन में हजारों दर्शकों और जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी की संभावना थी, तब पत्रकारों के लिए सुरक्षित कवरेज स्थल, आतिशबाजी से निर्धारित दूरी और आपात स्थिति में तत्काल सहायता की व्यवस्था कितनी प्रभावी थी?
पहले की घटना के बाद भी सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल
स्थानीय स्तर पर यह भी चर्चा है कि पुलिस ग्राउंड में विजयादशमी के आयोजन के दौरान पहले भी आतिशबाजी से संबंधित घटना सामने आई थी। बताया जाता है कि करीब दो से तीन वर्ष पहले रावण दहन कार्यक्रम के दौरान आतिशबाजी के लिए मंच पर बांधा गया एक तार नीचे गिर गया था। उस समय मंच पर मौजूद मुख्य अतिथि और अन्य गणमान्य नागरिक बाल-बाल बचे थे।
यदि पूर्व में ऐसी घटना हुई थी, तो इस बार सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा और अतिरिक्त सावधानी बरतना बेहद जरूरी था। हालांकि, पुरानी घटना और इस बार हुए विस्फोट के बीच किसी तकनीकी समानता की पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए दोनों घटनाओं के संबंध में निष्कर्ष जांच के बाद ही निकाला जाना चाहिए।
आतिशबाजी के संचालन और सुरक्षा इंतजामों की जांच जरूरी
इतने बड़े सार्वजनिक आयोजन में आतिशबाजी का संचालन, तकनीकी जांच, दर्शकों से सुरक्षित दूरी, मंच के आसपास सुरक्षा घेरा और आपातकालीन सहायता की व्यवस्था महत्वपूर्ण होती है। विस्फोट के बाद यह जांचना जरूरी है कि आतिशबाजी में इस्तेमाल की गई सामग्री सुरक्षित थी या नहीं, रिमोट कंट्रोल प्रणाली में कोई तकनीकी खराबी थी या नहीं और निर्धारित सुरक्षा मानकों का पालन किया गया था या नहीं।
इसके साथ ही यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि आतिशबाजी के संचालन की जिम्मेदारी किस एजेंसी को दी गई थी और कार्यक्रम स्थल पर सुरक्षा व्यवस्था की निगरानी किसके जिम्मे थी।
पत्रकारों की सुरक्षा और जिम्मेदारी तय करने की मांग
घटना के बाद आयोजन की सुरक्षा व्यवस्था की निष्पक्ष जांच कराने और यदि किसी स्तर पर लापरवाही सामने आती है तो जिम्मेदारों पर नियमानुसार कार्रवाई करने की मांग उठ रही है। पत्रकारों के लिए निर्धारित मीडिया जोन, सुरक्षित दूरी, स्पष्ट प्रवेश-निकास मार्ग और आपातकालीन सहायता की व्यवस्था सुनिश्चित करने की जरूरत भी रेखांकित की जा रही है। भविष्य में इस तरह के बड़े आयोजनों के दौरान पत्रकारों को खतरनाक क्षेत्र में जाने की मजबूरी न हो, इसके लिए आयोजन समिति, संबंधित प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों को मिलकर ठोस व्यवस्था बनानी चाहिए। मीडिया कर्मियों की सुरक्षा को आयोजन की तैयारियों में प्राथमिकता दी जानी चाहिए, ताकि वे बिना अनावश्यक जोखिम के अपनी जिम्मेदारी निभा सकें। फिलहाल, पुलिस परेड ग्राउंड में हुए विस्फोट के वास्तविक कारणों और संभावित लापरवाही की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी। लेकिन इस घटना ने स्पष्ट कर दिया है कि बड़े सार्वजनिक आयोजनों में सुरक्षा व्यवस्था के साथ-साथ पत्रकारों के लिए सुरक्षित कवरेज स्थल की व्यवस्था भी बेहद जरूरी है।






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