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छत्तीसगढ़ के ‘राष्ट्रपति’ नाम वाले व्यक्ति का मामला राष्ट्रपति भवन पहुंचा, संवैधानिक पदों के नाम पर कानून बनाने की मांग

छत्तीसगढ़ के ‘राष्ट्रपति’ नाम वाले व्यक्ति का मामला राष्ट्रपति भवन पहुंचा, संवैधानिक पदों के नाम पर कानून बनाने की मांग

एमसीबी जिले के घुटरा गांव के निवासी का नाम 1988 से सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज, कांग्रेस नेता की याचिका पर राष्ट्रपति सचिवालय ने संबंधित विभागों को भेजा पत्र

रायपुर/मनेंद्रगढ़। छत्तीसगढ़ के मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर (एमसीबी) जिले में रहने वाले एक व्यक्ति का नाम ‘राष्ट्रपति’ होने का मामला अब देश की राजधानी दिल्ली स्थित राष्ट्रपति भवन तक पहुंच गया है। इस अनोखे नाम को लेकर संवैधानिक पदों और राष्ट्रीय पहचान से जुड़े शब्दों के व्यक्तिगत नाम के रूप में इस्तेमाल पर स्पष्ट कानूनी प्रावधान बनाने की मांग उठाई गई है। मामले में कांग्रेस नेता की ओर से दायर याचिका के बाद राष्ट्रपति सचिवालय ने संबंधित केंद्रीय विभागों और गृह मंत्रालय को पत्र भेजा है।

कांग्रेस नेता सौरव मिश्रा ने उठाया मामला

जानकारी के अनुसार, मनेंद्रगढ़ शहर ब्लॉक कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष सौरव मिश्रा ने इस विषय को लेकर राष्ट्रपति सचिवालय और प्रधानमंत्री कार्यालय में याचिका प्रस्तुत की थी। याचिका में मांग की गई कि ‘राष्ट्रपति’, ‘प्रधानमंत्री’, ‘मुख्यमंत्री’, ‘राज्यपाल’ और ‘भारत’ जैसे संवैधानिक पदों एवं राष्ट्रीय पहचान से जुड़े शब्दों के व्यक्तिगत नाम के रूप में उपयोग को लेकर स्पष्ट नियम बनाए जाएं। याचिकाकर्ता का तर्क है कि ऐसे महत्वपूर्ण शब्दों के इस्तेमाल को लेकर कानूनी स्थिति स्पष्ट होनी चाहिए, ताकि भविष्य में किसी प्रकार का भ्रम या विवाद उत्पन्न न हो। उन्होंने इस विषय पर विशेषज्ञों से विचार-विमर्श कर आवश्यक विधायी पहल करने की मांग की है।

1988 से स्कूल के रिकॉर्ड में दर्ज है नाम

यह मामला इसलिए भी चर्चा में है, क्योंकि संबंधित व्यक्ति का नाम कोई हालिया बदलाव नहीं, बल्कि दशकों पुराना बताया जा रहा है। एमसीबी जिले के ग्राम घुटरा निवासी इस व्यक्ति का नाम प्राथमिक विद्यालय के दाखिला रजिस्टर में 14 जुलाई 1988 को ‘राष्ट्रपति’ दर्ज किया गया था। स्कूल के प्रधानपाठक अनिल राय के अनुसार, विद्यालय के पुराने रिकॉर्ड में व्यक्ति का यही नाम दर्ज है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, उसकी शैक्षणिक मार्कशीट और बैंक पासबुक में भी ‘राष्ट्रपति’ नाम अंकित है। इससे स्पष्ट होता है कि यह नाम लंबे समय से उसके आधिकारिक दस्तावेजों में इस्तेमाल होता रहा है।


संवैधानिक पदों के नाम पर कानून बनाने की मांग

याचिका में कहा गया है कि देश में सर्वोच्च संवैधानिक पदों और राष्ट्रीय प्रतीकात्मक पहचान से जुड़े शब्दों के इस्तेमाल के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश होने चाहिए। मांग की गई है कि केंद्र सरकार इस विषय पर कानूनी और संवैधानिक पहलुओं का अध्ययन कर उचित कानून या प्रावधान तैयार करे। हालांकि, राष्ट्रपति सचिवालय की ओर से याचिका को संबंधित विभागों तक भेजे जाने का अर्थ यह नहीं है कि सरकार ने किसी नए कानून को मंजूरी दे दी है। फिलहाल यह मामला विचारार्थ संबंधित विभागों तक पहुंचने की प्रक्रिया में है।

अब केंद्र सरकार के रुख पर टिकी निगाहें

राष्ट्रपति सचिवालय से संबंधित विभागों को पत्र भेजे जाने के बाद अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि गृह मंत्रालय और केंद्र सरकार इस मांग पर क्या रुख अपनाते हैं। क्या भविष्य में संवैधानिक पदों और राष्ट्रीय पहचान से जुड़े शब्दों को व्यक्तिगत नाम के रूप में रखने के संबंध में कोई स्पष्ट कानूनी व्यवस्था बनाई जाएगी, यह आने वाले समय में ही पता चलेगा। फिलहाल, छत्तीसगढ़ के एक गांव के निवासी ‘राष्ट्रपति’ के नाम से जुड़ा यह मामला स्थानीय स्तर से निकलकर राष्ट्रीय चर्चा का विषय बन गया है। 



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