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बिलासपुर में स्ट्रीट लाइट बंद, सड़कों पर अंधेरा: जिम्मेदार कौन? विकास के दावों पर उठे सवाल

बिलासपुर में स्ट्रीट लाइटों की बदहाली पर सवाल: करोड़ों की व्यवस्था, फिर भी सड़कों पर अंधेरा! जिम्मेदारी किसकी?

कहीं लाइट बंद, कहीं रखरखाव का अभाव तो कहीं सड़क पर गड्ढे। विकास के दावों के बीच जनता पूछ रही है—सार्वजनिक धन से बनी व्यवस्था की जवाबदेही कौन तय करेगा?

बिलासपुर | विशेष जनहित रिपोर्ट

बिलासपुर की सड़क पर स्ट्रीट लाइटों की व्यवस्था
बिलासपुर में सड़क प्रकाश व्यवस्था की सांकेतिक तस्वीर

बिलासपुर। न्यायधानी बिलासपुर में सड़क, चौक-चौराहों और सार्वजनिक मार्गों पर स्ट्रीट लाइट लगाने का उद्देश्य शहर को रोशन करना, यातायात को सुरक्षित बनाना और नागरिकों को रात में आवागमन की सुविधा देना है। लेकिन जब अलग-अलग इलाकों में लाइटें बंद होने, खराब होने या समय पर मरम्मत नहीं होने की शिकायतें सामने आती हैं, तो व्यवस्था की जवाबदेही पर सवाल उठना स्वाभाविक है।

सवाल यह है कि सार्वजनिक धन से लगाई गई स्ट्रीट लाइटों का नियमित निरीक्षण कौन करता है? खराब लाइटों को ठीक कराने की जिम्मेदारी किसकी है? रखरखाव के लिए यदि किसी एजेंसी को अनुबंध दिया गया है, तो उसके काम की निगरानी कैसे होती है?

स्ट्रीट लाइटों का मामला हाईकोर्ट तक पहुँचा

बिलासपुर में बंद स्ट्रीट लाइटों का मुद्दा पहले भी न्यायालय तक पहुँच चुका है। सितंबर 2024 में प्रकाशित समाचार के आधार पर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेते हुए इस विषय पर सुनवाई की थी।

न्यायालय में प्रस्तुत नगर निगम के शपथपत्र के अनुसार, निगम क्षेत्र में कुल 34,330 स्ट्रीट लाइटें थीं। इनमें 28,563 लाइटें एनर्जी एफिशिएंसी सर्विसेज लिमिटेड (EESL) से संबंधित थीं, जबकि 5,767 लाइटें नगर निगम बिलासपुर और स्मार्ट सिटी लिमिटेड के अंतर्गत थीं।

शपथपत्र में बताया गया था कि 1 अगस्त से 4 सितंबर 2024 के बीच स्ट्रीट लाइटों से संबंधित 421 शिकायतें प्राप्त हुई थीं, जिनमें से 199 के निराकरण की जानकारी दी गई थी। यह उस समय का रिकॉर्ड है, वर्तमान स्थिति का आँकड़ा नहीं।

नगर निगम के अनुसार, EESL के अंतर्गत आने वाली लाइटों की मरम्मत की जिम्मेदारी EESL की थी, जबकि अन्य लाइटों का रखरखाव नगर निगम और उसके ठेकेदार के माध्यम से किया जाता था।

सवाल यह है कि वर्तमान में किस क्षेत्र की लाइट किस एजेंसी के अधीन है और खराबी आने पर उसे कितने समय में ठीक किया जाता है?

न्यायालयीन रिकॉर्ड: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में स्ट्रीट लाइटों से संबंधित मामला पढ़ें।

बिलासपुर की सड़क और स्ट्रीट लाइट व्यवस्था
बिलासपुर की शहरी सड़क का दृश्य।

चीन में बनी लाइटें लगाने की चर्चा, लेकिन प्रमाण क्या हैं?

इस मुद्दे पर एक और सवाल उठ रहा है—शहर में लगाई गई स्ट्रीट लाइटों का निर्माता कौन है और उनका निर्माण किस देश में हुआ था? क्या वे भारत में निर्मित थीं या उनमें विदेश से आयात किए गए उपकरणों का इस्तेमाल किया गया था?

चीन में बनी लाइटें लगाए जाने संबंधी सूचना की स्वतंत्र पुष्टि के लिए खरीद आदेश, निविदा दस्तावेज, निर्माता का नाम, मॉडल नंबर और उत्पाद की तकनीकी जानकारी जरूरी है। इन दस्तावेजों के बिना किसी खास कंपनी या अधिकारी पर आरोप लगाना उचित नहीं होगा।

यदि सरकार स्वदेशी उत्पादों और मेड इन इंडिया को प्रोत्साहित करने की बात करती है, तो संबंधित परियोजना की खरीद प्रक्रिया और उत्पादों की उत्पत्ति के बारे में पारदर्शी जानकारी उपलब्ध कराना भी महत्वपूर्ण है। हालांकि, किसी उत्पाद का विदेशी होना अपने-आप में भ्रष्टाचार का प्रमाण नहीं है।

इसलिए संबंधित विभाग को स्पष्ट करना चाहिए कि स्ट्रीट लाइटें कहाँ से खरीदी गईं, गुणवत्ता की जाँच किसने की, वारंटी कितने समय की थी और खराब लाइटों को बदलने की जिम्मेदारी किसकी है।

सड़क पर गड्ढे और अंधेरा: दुर्घटना का बढ़ता खतरा

रात में सड़क पर पर्याप्त रोशनी नहीं होने और जगह-जगह गड्ढे मौजूद होने से वाहन चालकों तथा पैदल यात्रियों की परेशानी बढ़ सकती है। दोपहिया वाहन चालकों, बुजुर्गों और रात में काम से लौटने वाले लोगों के लिए ऐसी परिस्थितियाँ विशेष रूप से जोखिमपूर्ण हो सकती हैं।

बिलासपुर की सड़क पर लगी स्ट्रीट लाइटें
स्ट्रीट लाइटों से रोशन सड़क की सांकेतिक तस्वीर। 

सितंबर 2026 में बिलासपुर की सड़कों और प्रकाश व्यवस्था को लेकर प्रशासनिक स्तर पर सुधार के निर्देश दिए जाने की रिपोर्ट भी प्रकाशित हुई थी। हालांकि, इन निर्देशों के बाद अब तक कितने स्थानों पर काम पूरा हुआ और कितनी लाइटें बंद हैं, इसका अद्यतन और वार्डवार विवरण सामने आना चाहिए।

मेंटेनेंस के नाम पर खर्च का हिसाब कौन देगा?

स्ट्रीट लाइट खरीदना और खंभों पर लगाना परियोजना का पहला चरण है। इसके बाद नियमित निरीक्षण, खराब उपकरणों की मरम्मत, बिजली आपूर्ति और शिकायतों का समय पर निराकरण भी उतना ही जरूरी है।

यदि रखरखाव के लिए किसी कंपनी या ठेकेदार को भुगतान किया जा रहा है, तो उसके कार्यों का मूल्यांकन होना चाहिए। नागरिकों को यह जानकारी मिलनी चाहिए कि शिकायत कहाँ दर्ज करनी है, उसका समाधान कितने समय में होगा और काम पूरा होने की पुष्टि कौन करेगा।

जनता को केवल लाइट लगाने की जानकारी नहीं, बल्कि यह भी पता होना चाहिए कि लाइट चालू है या नहीं और खराब होने पर उसे कब तक ठीक किया जाएगा।

राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के बीच जनता की समस्या कौन सुनेगा?

विकास के मुद्दों पर सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप लोकतंत्र का हिस्सा हैं। लेकिन सड़क और प्रकाश व्यवस्था जैसी बुनियादी समस्याओं का समाधान केवल बयानबाजी से नहीं होगा। जनता को समयबद्ध कार्रवाई और काम का स्पष्ट हिसाब चाहिए।

नगर निगम, संबंधित जोन कार्यालय, EESL और स्मार्ट सिटी से जुड़ी एजेंसियों की जिम्मेदारी स्पष्ट होनी चाहिए। शिकायतों को एक कार्यालय से दूसरे कार्यालय भेजने के बजाय अंतिम समाधान सुनिश्चित किया जाना चाहिए।

जनता कहाँ शिकायत करे?

स्ट्रीट लाइट बंद होने या अन्य नगरीय समस्याओं के लिए नागरिक छत्तीसगढ़ सरकार की निदान 1100 शिकायत व्यवस्था का उपयोग कर सकते हैं। शिकायत करते समय वार्ड, सड़क या चौक का नाम, नजदीकी पहचान और संभव हो तो फोटो दें। शिकायत संख्या सुरक्षित रखें और समाधान की पुष्टि मौके पर करें।

नगर निगम से जनता के सीधे सवाल

  • वर्तमान में शहर में कुल कितनी स्ट्रीट लाइटें चालू और कितनी बंद हैं?
  • वार्डवार और जोनवार खराब लाइटों की सूची कहाँ उपलब्ध है?
  • EESL, नगर निगम और स्मार्ट सिटी के बीच रखरखाव की जिम्मेदारी कैसे तय है?
  • खरीद, स्थापना और मरम्मत पर पिछले तीन वर्षों में कितना खर्च हुआ?
  • लाइटों के निर्माता, निर्माण के देश, गुणवत्ता और वारंटी से जुड़े दस्तावेज क्या हैं?
  • खराब लाइट की शिकायत मिलने के बाद मरम्मत के लिए निर्धारित समय-सीमा क्या है?
  • सड़क मरम्मत और प्रकाश व्यवस्था सुधारने के हालिया निर्देशों पर कितना काम पूरा हुआ?

निष्कर्ष: जनता को आश्वासन नहीं, समाधान चाहिए

बिलासपुर न्यायधानी है। यहाँ की सड़कें, स्ट्रीट लाइटें और सार्वजनिक सुविधाएँ नागरिकों की रोजमर्रा की जरूरत हैं। यदि लाइटें लगाने के बाद बंद पड़ी रहें या मरम्मत में देरी हो, तो व्यवस्था की समीक्षा और जिम्मेदारी तय करना जरूरी है।

चीन में बनी लाइटों की चर्चा हो या रखरखाव में लापरवाही का सवाल—हर दावे की निष्पक्ष जाँच दस्तावेजों और तथ्यों के आधार पर होनी चाहिए। अनियमितता प्रमाणित होने पर नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए और विभागों को जनता के सामने वास्तविक स्थिति रखनी चाहिए।

आखिर जनता का सवाल सीधा है—स्ट्रीट लाइट लगाने के बाद उसकी रोशनी बनाए रखने की जिम्मेदारी किसकी है? यदि सड़क पर अंधेरा है, तो उसे दूर करने के लिए कौन जिम्मेदार होगा और कार्रवाई कब होगी?

बिलासपुर की जनता को केवल विकास के दावे नहीं, बल्कि सुरक्षित सड़कें, चालू स्ट्रीट लाइटें और पारदर्शी व्यवस्था चाहिए। यही विकास की असली कसौटी है।


संदर्भ:
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का रिकॉर्ड
नईदुनिया: बिलासपुर की स्ट्रीट लाइट व्यवस्था

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