मेरठ का ‘नीला ड्रम कांड’: 18 महीने से बंद मकान, बुजुर्ग मालिक की जिंदगी पर दोहरी मार; बोले- अब तो घर खोल दो!
मेरठ के चर्चित नीला ड्रम हत्याकांड में सौरभ राजपूत की हत्या के मामले ने एक परिवार को उजाड़ दिया, लेकिन इस घटना का असर अब मकान मालिक ओमपाल की जिंदगी पर भी गहरा पड़ रहा है। उनका दावा है कि जिस मकान के किराए से वह और उनकी पत्नी बुढ़ापे में अपना गुजारा करते थे, उसका एक हिस्सा करीब 18 महीने से पुलिस के ताले में बंद है। मकान मालिक का कहना है कि वह न उस हिस्से का इस्तेमाल कर पा रहे हैं और न ही उसे किराए पर दे पा रहे हैं। मकान बेचने की कोशिश भी कामयाब नहीं हो रही। ओमपाल ने पुलिस से गुहार लगाई है कि उन्हें उनका मकान वापस दिलाया जाए। उनका कहना है कि इस घटना के बाद आर्थिक परेशानी के साथ-साथ उन्हें सामाजिक उपेक्षा और मानसिक तनाव का भी सामना करना पड़ रहा है।
18 महीने से बंद है मकान का एक हिस्सा
मेरठ के ब्रह्मपुरी थाना क्षेत्र स्थित इंदिरा नगर में ओमपाल का करीब 200 गज का दो मंजिला मकान है। इसी मकान के एक हिस्से में मुस्कान और सौरभ राजपूत अपनी बेटी के साथ किराए पर रहते थे। इसी हिस्से में सौरभ की हत्या हुई थी। घटना के बाद पुलिस ने संबंधित हिस्से को सील कर दिया था। ओमपाल के मुताबिक, मकान का यह हिस्सा लंबे समय से बंद है और उसकी चाबी पुलिस के पास है। उनका कहना है कि उन्हें अब तक मकान खोलने की स्पष्ट समय-सीमा नहीं बताई गई है। पुलिस की ओर से कथित तौर पर उन्हें बताया गया कि मकान खोलने के लिए अदालत का आदेश जरूरी है।
किराए से चलता था घर का खर्च
ओमपाल ने बताया कि उन्होंने वर्ष 2022 में सौरभ के परिवार को मकान किराए पर दिया था। शुरुआत में किराया 3,500 रुपये प्रतिमाह था, जो बाद में बढ़कर 6,000 रुपये हो गया। उनके अनुसार, किराए की रकम से बुजुर्ग दंपती के घर का खर्च चलता था। ओमपाल का कहना है कि बेटे की मृत्यु के बाद उनकी आर्थिक स्थिति पहले से ही कमजोर थी। उम्र बढ़ने के साथ उन्होंने अपना कारोबार भी बंद कर दिया था। ऐसे में मकान से मिलने वाला किराया उनके और उनकी पत्नी के लिए आय का महत्वपूर्ण साधन था। अब किराया बंद होने और मकान के हिस्से का उपयोग नहीं कर पाने से उनकी मुश्किलें बढ़ गई हैं।
घर में आज भी रखा है सामान
ओमपाल के मुताबिक, जिस हिस्से में मुस्कान और सौरभ रहते थे, वहां घरेलू सामान, कपड़े, वॉशिंग मशीन और अन्य वस्तुएं अब भी रखी हुई हैं। उनका दावा है कि घटना के बाद से उन्होंने उस हिस्से को ठीक से देखा तक नहीं है और न ही वहां रखे सामान को छुआ है। वह कहते हैं कि उन्हें उस सामान से कोई मतलब नहीं है। पुलिस नियमानुसार जो उचित समझे, कार्रवाई करे, लेकिन उन्हें अपना मकान वापस मिलना चाहिए, ताकि वे उसकी देखभाल कर सकें और भविष्य में उसका इस्तेमाल कर सकें।
‘लोग ऐसे देखते हैं, जैसे हत्या हमने की हो’
इस पूरे मामले का सबसे दर्दनाक पहलू ओमपाल के अनुसार सामाजिक उपेक्षा है। उनका कहना है कि घटना के बाद आसपास के लोगों, रिश्तेदारों और परिचितों का व्यवहार बदल गया। कुछ लोग उनके घर आने से कतराने लगे हैं और मकान को लेकर तरह-तरह की बातें करते हैं।
ओमपाल का कहना है कि उन्होंने सौरभ और मुस्कान को परिवार सहित रहने के लिए मकान किराए पर दिया था। उस समय उन्हें दोनों सामान्य और अच्छे किराएदार लगे थे। उन्हें इस बात का अंदाजा नहीं था कि आगे चलकर उनके मकान में इतनी गंभीर वारदात हो जाएगी। वह दुख जताते हुए कहते हैं कि मकान किराए पर देना उनकी गलती नहीं थी, लेकिन अब उसी फैसले का खामियाजा उन्हें भुगतना पड़ रहा है।
स्वास्थ्य पर भी पड़ा असर
ओमपाल ने बताया कि इस घटना के बाद से वह लगातार तनाव में हैं। उनके अनुसार, बीते समय में उनका वजन काफी कम हुआ है और उन्हें शुगर, ब्लड प्रेशर तथा हृदय संबंधी समस्याओं का भी सामना करना पड़ रहा है। आंखों की परेशानी और शारीरिक कमजोरी के कारण रोजमर्रा के काम करना भी मुश्किल हो गया है। उनका कहना है कि बुढ़ापे में वह और उनकी पत्नी पहले ही कई परेशानियों से गुजर रहे थे, लेकिन मकान बंद होने और सामाजिक दूरी ने उनकी मुश्किलें और बढ़ा दी हैं।
मकान बेचने की कोशिश भी नाकाम
ओमपाल के अनुसार, उन्होंने मकान बेचने के बारे में भी सोचा, ताकि अपने मूल गांव लौटकर बाकी जीवन शांति से बिता सकें। उन्होंने कुछ प्रॉपर्टी डीलरों से भी संपर्क किया, लेकिन उनके मुताबिक घटना की वजह से कोई खरीदार सामने नहीं आया। उनका कहना है कि मकान के एक हिस्से में हुई वारदात की वजह से पूरे घर की छवि प्रभावित हुई है। दूसरी ओर, बंद हिस्से की देखभाल नहीं हो पाने और बिजली के बिल जैसे खर्चों की चिंता भी बनी हुई है।
एक बेटा खोया, अब बुढ़ापे का सहारा भी मुश्किल में
ओमपाल ने बताया कि उनका इकलौता बेटा भी कम उम्र में चल बसा था। बेटे की मृत्यु के बाद उन्होंने अपनी बहू की दूसरी शादी करा दी। इसके बाद वह और उनकी पत्नी अकेले ही जीवन गुजार रहे थे। उम्र बढ़ने पर कारोबार बंद कर दिया और मकान के किराए पर निर्भर हो गए। अब उनकी इच्छा है कि संबंधित हिस्से को नियमानुसार खोला जाए, मकान की स्थिति का जायजा लेने दिया जाए और वह फिर से अपनी संपत्ति का उपयोग कर सकें।
पुलिस और प्रशासन से गुहार
ओमपाल की मांग है कि मामले में कानूनी प्रक्रिया पूरी कर उन्हें मकान के बंद हिस्से के संबंध में स्पष्ट जानकारी दी जाए। यदि उसे खोलने के लिए अदालत के आदेश की आवश्यकता है, तो संबंधित प्रक्रिया और आगे की कार्रवाई के बारे में उन्हें बताया जाए। इस मामले में मकान मालिक के आरोपों और दावों के संबंध में पुलिस का आधिकारिक पक्ष सामने आना भी जरूरी है। मकान खोलने का निर्णय जांच, साक्ष्य संरक्षण और न्यायालय के निर्देशों के अनुरूप ही लिया जा सकता है। सवाल यही है: एक गंभीर आपराधिक घटना की जांच के बाद मकान मालिक को अपनी संपत्ति के इस्तेमाल के लिए कितने समय तक इंतजार करना पड़ेगा? ओमपाल जैसे बुजुर्ग दंपती के लिए यह केवल बंद मकान का मामला नहीं, बल्कि आजीविका, सम्मान और सुरक्षित बुढ़ापे से जुड़ा सवाल भी है।









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