टीवी चैनलों की मनमानी पर केंद्र सख्त! आतंकी ऑपरेशन की LIVE कवरेज से AI तक, नियम तोड़े तो होगी कार्रवाई
नई दिल्ली। टीवी समाचारों के प्रसारण में संपादकीय जिम्मेदारी और नियमों के पालन को लेकर केंद्र सरकार ने निजी सैटेलाइट टीवी चैनलों को सख्त संदेश दिया है। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने सभी निजी टीवी चैनलों को केबल टेलीविजन नेटवर्क (विनियमन) अधिनियम, 1995 और संबंधित नियमों के तहत निर्धारित प्रोग्राम कोड का पूरी तरह पालन करने की सलाह दी है। मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि नियमों का उल्लंघन होने पर संबंधित प्रावधानों के तहत कार्रवाई की जा सकती है। मंत्रालय की एडवाइजरी में आतंकरोधी अभियानों की लाइव कवरेज, हिंसक तस्वीरों का प्रसारण, अपराध की सनसनीखेज रिपोर्टिंग, महिलाओं एवं बच्चों से जुड़े अपराधों में पीड़ितों की पहचान उजागर करने, लाइव डिबेट में भड़काऊ बयान और खबरों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के इस्तेमाल जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर विशेष जोर दिया गया है।
क्यों जारी करनी पड़ी सख्त एडवाइजरी?
सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने केबल टेलीविजन नेटवर्क नियम, 1994 के नियम 6 के तहत निर्धारित प्रोग्राम कोड के पालन को लेकर यह सलाह जारी की है। मंत्रालय के अनुसार, प्रोग्राम कोड के अनुपालन की समीक्षा करने वाली अंतर-विभागीय समिति (IDC) ने कुछ चैनलों पर प्रसारित सामग्री को लेकर चिंता जताई थी।
समिति ने यह भी देखा कि अलग-अलग चैनलों पर एक ही विषय से संबंधित मिलती-जुलती खबरें और तस्वीरें बार-बार दिखाई जा रही थीं। इसके मद्देनजर मंत्रालय ने चैनलों को केवल नियमों का औपचारिक पालन करने के बजाय उनकी मूल भावना को समझने और जिम्मेदार पत्रकारिता सुनिश्चित करने की सलाह दी है।
आतंकी ऑपरेशन की LIVE कवरेज नहीं होगी
मंत्रालय ने सुरक्षा बलों के आतंकरोधी अभियानों की लाइव कवरेज को लेकर स्पष्ट निर्देश दिए हैं। केबल टेलीविजन नेटवर्क नियम, 1994 के नियम 6(1)(p) के तहत ऐसे अभियानों का सीधा प्रसारण प्रतिबंधित है। अभियान समाप्त होने तक चैनलों को अधिकृत अधिकारी की ओर से समय-समय पर दी जाने वाली आधिकारिक जानकारी और ब्रीफिंग तक अपनी कवरेज सीमित रखने की सलाह दी गई है। इसका उद्देश्य अभियान से जुड़ी संवेदनशील जानकारी सार्वजनिक होने से रोकना और सुरक्षा बलों की कार्रवाई को जोखिम में पड़ने से बचाना है। इसके अलावा, पुरानी तस्वीरों और वीडियो को वर्तमान घटनाक्रम बताकर प्रसारित करने से बचने के लिए आवश्यकतानुसार फुटेज पर तारीख और समय का उल्लेख करने की भी सलाह दी गई है। मंत्रालय इस विषय पर 12 जून 2024 और 26 अप्रैल 2025 को भी एडवाइजरी जारी कर चुका है।
हिंसक तस्वीरें और सनसनीखेज खबरों पर सख्ती
अपराध, दुर्घटना और हिंसा से जुड़ी खबरों के प्रसारण में भी चैनलों को अतिरिक्त सावधानी बरतनी होगी। मंत्रालय ने हिंसक, परेशान करने वाले और ग्राफिक दृश्यों को दर्शकों की संवेदनशीलता तथा शालीनता का ध्यान रखते हुए प्रसारित करने की सलाह दी है। खबरें सत्यापित तथ्यों पर आधारित होनी चाहिए और किसी घटना को बढ़ा-चढ़ाकर या सनसनीखेज तरीके से प्रस्तुत करने से बचना चाहिए। परेशान करने वाले दृश्यों को बार-बार दिखाने के बजाय जरूरत के अनुसार उन्हें धुंधला करने या आपत्तिजनक हिस्सों को ढकने की व्यवस्था करने पर भी जोर दिया गया है। मंत्रालय का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि अपराध या गैरकानूनी गतिविधियों को इस तरह प्रस्तुत न किया जाए, जिससे वे सामान्य, स्वीकार्य या आकर्षक दिखाई देने लगें।
महिलाओं और बच्चों के खिलाफ अपराध में पहचान उजागर करना पड़ेगा भारी
महिलाओं और बच्चों के खिलाफ अपराध से जुड़ी खबरों में पीड़ितों की निजता की रक्षा करना अनिवार्य है। मंत्रालय ने विशेष रूप से यौन अपराधों के पीड़ितों की पहचान गोपनीय रखने पर जोर दिया है। पीड़ित का नाम, तस्वीर, परिवार से संबंधित विवरण या ऐसी कोई भी जानकारी प्रसारित नहीं की जानी चाहिए, जिससे उसकी पहचान उजागर हो सकती हो। चैनलों को संबंधित कानूनों और न्यायालयों के निर्देशों का पालन करते हुए संवेदनशील मामलों की रिपोर्टिंग करनी होगी।
प्राकृतिक आपदाओं, बड़े हादसों और अन्य गंभीर घटनाओं की कवरेज में भी तथ्यों की पुष्टि करने तथा आवश्यकतानुसार फुटेज पर समय और तारीख का उल्लेख करने की सलाह दी गई है, ताकि दर्शकों के बीच भ्रम और अनावश्यक दहशत न फैले।
लाइव डिबेट में भड़काऊ बयान आए तो चैनल की जिम्मेदारी
टीवी चैनलों पर होने वाली लाइव बहस और पैनल चर्चाओं को लेकर भी मंत्रालय ने संपादकीय नियंत्रण मजबूत रखने की सलाह दी है। चर्चाओं में ऐसी सामग्री प्रसारित नहीं होनी चाहिए, जो सांप्रदायिक तनाव बढ़ाए या अन्य लागू नियमों का उल्लंघन करे।
चैनलों को पैनलिस्ट और प्रतिभागियों का चयन सावधानी से करने तथा उन्हें प्रसारण से पहले आवश्यक निर्देश देने को कहा गया है। यदि लाइव चर्चा के दौरान कोई प्रतिभागी अपमानजनक, अशोभनीय या भड़काऊ टिप्पणी करता है, तो परिस्थितियों के अनुसार चैनल को आवाज म्यूट करने, डिस्क्लेमर देने, प्रसारण रोकने या फीड बंद करने जैसे कदम उठाने चाहिए। इसका अर्थ है कि लाइव कार्यक्रम के दौरान भी चैनल की संपादकीय जिम्मेदारी बनी रहती है। केवल यह कहकर जिम्मेदारी से बचा नहीं जा सकता कि विवादित बयान किसी पैनलिस्ट ने दिया था।
भारत के नक्शे के इस्तेमाल पर भी निर्देश
मंत्रालय ने चैनलों को भारत के नक्शे के लिए भारतीय सर्वेक्षण विभाग (Survey of India) की ओर से प्रकाशित प्रामाणिक नक्शों का इस्तेमाल करने की सलाह दी है। यह विषय समाचार प्रसारण, टीवी ग्राफिक्स और डिजिटल प्रस्तुतियों के लिए भी महत्वपूर्ण है।
AI से खबर बनाने पर भी रहेगी नजर
समाचारों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और जनरेटिव AI के बढ़ते इस्तेमाल को देखते हुए मंत्रालय ने इस तकनीक के प्रयोग में सावधानी बरतने की सलाह दी है। AI का उपयोग ग्राफिक्स और वर्चुअल न्यूज प्रेजेंटेशन जैसे कार्यों में सहायक साधन के रूप में किया जा सकता है, लेकिन इससे समाचार की सटीकता, प्रामाणिकता और संवेदनशीलता प्रभावित नहीं होनी चाहिए। चैनलों को अपने संपादकीय और कंटेंट रिव्यू सिस्टम को मजबूत करने के साथ-साथ समाचार जुटाने, संपादन, प्रोडक्शन, ट्रांसमिशन और प्रसारण से जुड़े कर्मचारियों को प्रोग्राम कोड के बारे में जागरूक करने की सलाह दी गई है। इसके लिए नियमित प्रशिक्षण और वर्कशॉप आयोजित करने पर भी जोर दिया गया है।
नियम तोड़ने पर क्या होगी कार्रवाई?
केबल टेलीविजन नेटवर्क (विनियमन) अधिनियम, 1995 की धारा 5 और केबल टेलीविजन नेटवर्क नियम, 1994 के नियम 6 के तहत प्रोग्राम कोड का पालन करना जरूरी है। मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि संबंधित प्रावधानों का उल्लंघन होने पर लागू कानून और नियमों के अनुसार कार्रवाई की जा सकती है। हालांकि, एडवाइजरी जारी होने का मतलब यह नहीं है कि प्रत्येक टीवी चैनल पर स्वतः कोई नई पाबंदी लग गई है। इसका मुख्य उद्देश्य पहले से लागू नियमों के पालन को सुनिश्चित करना और समाचार प्रसारण में जवाबदेही बढ़ाना है।
जिम्मेदार पत्रकारिता पर केंद्र का जोर
केंद्र सरकार की इस एडवाइजरी का संदेश स्पष्ट है—समाचार प्रसारित करने की स्वतंत्रता के साथ जिम्मेदारी भी जुड़ी हुई है। तेज और प्रभावशाली रिपोर्टिंग के बीच तथ्यों की पुष्टि, राष्ट्रीय सुरक्षा, पीड़ितों की निजता और सामाजिक सौहार्द का ध्यान रखना जरूरी है। अब निजी टीवी चैनलों के सामने चुनौती यह है कि वे दर्शकों तक खबरें तेजी से पहुंचाने के साथ-साथ पत्रकारिता के मानकों और निर्धारित प्रोग्राम कोड का भी पूरी गंभीरता से पालन करें।
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