बिलासपुर सेंट्रल जेल में दीपोत्सव की मिठास रोकने पर विवाद, कलेक्टर की सख्ती के बाद हरकत में आया जेल प्रबंधन
परिजनों द्वारा भेजी गई मिठाई मुख्य द्वार से लौटाने का आरोप, महिला जेलर की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल; कलेक्टर संजय अग्रवाल ने जेल अधीक्षक को दिए मिठाई पहुंचाने के निर्देश।
बिलासपुर। दीपावली खुशियों, आपसी प्रेम और मिठास बांटने का त्योहार है, लेकिन बिलासपुर सेंट्रल जेल में इस बार बंदियों के लिए दीपोत्सव की खुशियां फीकी पड़ती नजर आईं। आरोप है कि दीपावली के अवसर पर अपने परिजनों से मिलने वाली मिठाई लेकर पहुंचे लोगों को जेल के मुख्य द्वार से ही वापस लौटा दिया गया। इस घटना के बाद जेल प्रबंधन की कार्यप्रणाली और मानवीय संवेदनाओं को लेकर सवाल खड़े होने लगे। हालांकि, कलेक्टर संजय अग्रवाल के हस्तक्षेप के बाद स्थिति बदली और जेल प्रबंधन को बंदियों तक मिठाई पहुंचाने की व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।
परिजनों की उम्मीदों पर फिरा पानी
दीपावली के अवसर पर बंदियों के परिजन अपने प्रियजनों के लिए मिठाई लेकर बिलासपुर सेंट्रल जेल पहुंचे थे। आरोप है कि महिला जेलर कोकिला वर्मा ने मिठाई अंदर ले जाने की अनुमति नहीं दी और मुख्य द्वार से ही वापस कर दिया। इससे त्योहार के मौके पर अपने परिवार से मिलने वाली मिठास का इंतजार कर रहे बंदियों को निराशा का सामना करना पड़ा।
जेल प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल
जेल के भीतर सुरक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक नियंत्रण की जिम्मेदारी जेल अधीक्षक खोमेश मंडावी की होती है। ऐसे में सवाल उठने लगे कि यदि मिठाई पर रोक लगाने का निर्णय लिया गया था, तो क्या इसके लिए कोई स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए गए थे? साथ ही, मातहत अधिकारियों के फैसलों पर जेल अधीक्षक की भूमिका को लेकर भी चर्चा शुरू हो गई।
सुरक्षा के साथ मानवीय संवेदनाएं भी जरूरी
एक सेवानिवृत्त जेलर ने नाम प्रकाशित नहीं करने की शर्त पर बताया कि जेल में सुरक्षा नियमों का पालन बेहद जरूरी है, लेकिन त्योहारों के दौरान बंदियों को परिवार की ओर से मिलने वाली छोटी-छोटी सौगातें उनके मानसिक संबल के लिए महत्वपूर्ण होती हैं। मिठाई की जांच कराकर उसे अंदर भेजने की व्यवस्था बनाई जा सकती थी।
डीजी जेल के आदेश का दिया गया हवाला
सूत्रों के मुताबिक, प्रदेश की कुछ अन्य जेलों में सुरक्षा जांच के बाद सोनपापड़ी सहित अन्य मिठाइयां बंदियों तक पहुंचाई जा रही थीं, जबकि बिलासपुर सेंट्रल जेल में कथित तौर पर डीजी जेल के आदेश का हवाला देकर मिठाई ले जाने पर रोक लगा दी गई। इस संबंध में महिला जेलर कोकिला वर्मा से उनका पक्ष जानने के लिए संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उनसे बात नहीं हो सकी।
कलेक्टर संजय अग्रवाल का हस्तक्षेप, जेल अधीक्षक को लगाई फटकार
मामले की जानकारी मिलने पर कलेक्टर संजय अग्रवाल से पूछा गया कि क्या बिलासपुर जेल में दीपावली के अवसर पर मिठाई ले जाने को लेकर कोई विशेष प्रतिबंध लगाया गया है। बताया जाता है कि कलेक्टर ने इस संबंध में अनभिज्ञता जताई और तत्काल जेल अधीक्षक खोमेश मंडावी से फोन पर चर्चा की।
इस दौरान जेल अधीक्षक ने कथित तौर पर सफाई दी कि दीपावली से पहले ही बड़ी मात्रा में मिठाइयां आने लगी थीं, जिसके कारण उन्हें रोकना पड़ा। इस पर कलेक्टर ने नाराजगी जताते हुए स्पष्ट निर्देश दिए कि जेल की व्यवस्था बनाए रखना जेल प्रबंधन की जिम्मेदारी है। त्योहारों पर वर्षों से चली आ रही परंपराएं नहीं टूटनी चाहिए। सुरक्षा व्यवस्था के साथ उचित प्रबंध कर बंदियों तक मिठाई पहुंचाना सुनिश्चित किया जाए।
कलेक्टर की सख्ती के बाद खुला मिठाई पहुंचने का रास्ता
कलेक्टर के हस्तक्षेप के बाद जेल प्रबंधन को बंदियों तक दीपावली की मिठाई पहुंचाने की व्यवस्था करने के निर्देश दिए गए। इसके साथ ही परिजनों की ओर से भेजी गई मिठाई को लेकर उठा विवाद भी चर्चा में आ गया।
अब बड़ा सवाल यह है कि यदि सुरक्षा जांच के बाद मिठाई पहुंचाने की व्यवस्था संभव थी, तो शुरुआत में परिजनों को वापस क्यों लौटाया गया? जेल प्रशासन को यह स्पष्ट करना चाहिए कि मिठाई रोकने का निर्णय किन नियमों और आदेशों के तहत लिया गया था।
त्योहार की खुशियां हर किसी के लिए मायने रखती हैं। जेल की चारदीवारी के भीतर बंद व्यक्ति भी किसी का बेटा, पिता, भाई या पति है। सुरक्षा नियमों का पालन जरूरी है, लेकिन मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक रिश्तों के लिए भी व्यवस्था में उचित स्थान होना चाहिए।






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