धनबाद जिले के बाघमारा प्रखण्ड अंतर्गत जमुआटाँड़ पंचायत के खमारगोड़ा बस्ती में डीएमएफटी फण्ड से करोड़ों रुपये की लागत से कतरी नदी पर पुल बनाया जा रहा है. यह पुल पंचायत के लोगों को रास नही आ रहा है. लोग धनबाद उपायुक्त को पत्र लिखकर इस पुल निर्माण का विरोध भी जता चुके हैं. आरटीआई से मिली जानकारी के अनुसार 6 जुलाई 2022 को बाघमारा के तत्कालीन बीडीओ के आदेशानुसार जमुआटांड पंचायत के मुखिया निरंजन गोप की अध्यक्षता में एक आमसभा का आयोजन किया गया. इस आमसभा में मुखिया के अतिरिक्त यशोदा देवी, गीता मोदी, बैजंती देवी, फुल चांद कोड़ा, सुशील कुमार सिंह, गौतम महतो, शनिचर सिंह, समर सिंह, बबनी देवी, नेपाल सिंह, गौरि सिंह,सुनील राय, संगीता देवी, ज्ञानेश्वर सिंह, धीरन रजक एवं विमल सिंह सहित कुल 17 लोग उपस्थित हुए, जिसमें कई योजनाओं के साथ यह पुल भी पास किया गया. सनद रहे कि इस आमसभा में उप मुखिया, पसंस, वार्ड सदस्य, पंचायत सचिव एवं अन्य जिम्मेदार प्रतिनिधि भी नदारद रहे. पसंस प्रतिनिधि गौतम महतो एवं कुछ ग्रामीणों ने बताया कि पंचायत की कुल आबादी लगभग 5 हजार है. उक्त आमसभा होने की जानकारी उसे नही है.
गौर करने वाली बात यह है कि 1 प्रतिशत से भी कम लोगों ने मिलकर पुल बनाने जैसा फैसला ले लिया. 99 प्रतिशत लोगों से उसकी राय नही पूछी गई कि बस्ती में पुल बनाने की आवश्यकता है भी या नही. शायद इसी कारण बस्ती के लोग पुल का विरोध कर रहे हैं. वहीं एक प्रतिशत से भी कम लोगों की मांग पर इस पुल की अनुशंसा करने वाले और इस योजना को स्वीकृति देने वाले पदाधिकारी पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं. इस पूरे क्रियाकलापों से ऐसा प्रतीत होता है कि सरकारी विभागों में बैठे जिम्मेदार पदाधिकारी ही डीएमएफटी फंड की बर्बादी कर रहे हैं. जहां योजना की आवश्यकता नहीं है वहां योजना पास कर रहे हैं और जहां योजना की आवश्यकता है उस ओर ध्यान भी नहीं दे रहे हैं. ग्रामीणों ने आरोप लगाते हुए कहा कि यह पुल केवल भूमाफियाओं को लाभ पहुंचाने के लिए बनाया जा रहा है. इस पुल से ग्रामीणों को कोई लाभ नही है. ग्रामीणों ने कहा कि 17 लोगों की उपस्थिति में आम सभा करने वाले पंचायत के मुखिया को एवं पुल की अनुशंसा और इसकी स्वीकृति देने वाले अधिकारियों को यह बताना चाहिए कि इस पुल का निर्माण किसके लिए और क्यों हो रहा है?

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