सिनेमा रोड कतरास में स्थित काली मंदिर विगत 50 वर्षों से भक्तजनों के बीच आस्था और अटूट विश्वास का प्रतीक बना हुआ है. हर रोज इस मंदिर में सैकड़ों लोग पूजा अर्चना के लिए सपरिवार आते हैं. इस मन्दिर में माँ फलाहारी दक्षिणेश्वरी काली के रूप में विराजती हैं. इसलिए इस मंदिर को फलाहारी दक्षिणेश्वरी काली मंदिर के नाम से जाना जाता है.
इसकी पूजा सात्विक पद्धति से की जाती है. मंदिर समिति द्वारा 50वें वार्षिकोत्सव को स्वर्ण जयंती के रूप में मनाया जा रहा है. इस वर्ष के तीन दिवसीय आयोजन में विशेष अनुष्ठान प्रयोजन हेतु पश्चिम बंगाल के बांकुड़ा जिले से कर्मकांडी ब्राम्हणों का आगमन हुआ है. साथ ही 6 जून को पूर्णाहुति के दिन कोलकाता के भजन कलाकारों का भी जुटान होना है. आयोजन का शुभारंभ बुधवार को प्रभात फेरी के साथ किया गया.
जिसमें सैकड़ों की संख्या में महिला पुरुष श्रद्धालु भक्त सामिल हुए. माता की पालकी को गाजे बाजे के साथ पूरा नगर भ्रमण कराया गया जो कि सूर्य मन्दिर होते हुए वापस काली मंदिर पहुँचा. शोभायात्रा में कई प्रकार के विशेष आकर्षित झांकियों को भी शामिल किया गया है. विद्युत साजसज्जा से मन्दिर एवम आस पास के क्षेत्रों को भव्य रूप से सजाया गया हैं. जो लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र बना हुआ है.
मौके पर मुख्य रूप से बियाडा के पूर्व चेयरमैन विजय झा, टुंडी विधायक मथुरा प्रसाद महतो, जनशक्ति दल के सुप्रीमो सूरज महतो, जागो संस्था के प्रमुख चुन्ना यादव, मंदिर अध्यक्ष अशोक चौधरी, सचिव समीर पाल, नंदन बाबा, लखी नारायण भट्टाचार्य, जयंतो घोष माणिक दास, मोहन सरकार, प्रफुल्ल घोष, अनिल घोष तपन राय, निर्मल होड़, अनिर बांध, संदीप तपाधर, लालू चटर्जी, गौतम मंडल आदि शामिल थे.

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