कतरास: 05-08-2024
कतरास थाना क्षेत्र के छाताबाद कैलूडीह में स्थित जीटीएस डेको आउटसोर्सिंग कंपनी से ओबीआर पत्थरों की तस्करी सीआईएसएफ की मौजूदगी में धड़ल्ले से जारी है. हर रोज सैकड़ो खाली ट्रैक्टर ओबीआर डंपिंग क्षेत्र में घुसते हैं और ओबीआर पत्थर भर भर कर खुलेआम ले जाते हैं. लेकिन प्रबंधन, प्रशासन और सीआईएसएफ अपनी आंखें बंद किए रहते हैं. आप वीडियो में स्पष्ट देख सकते हैं कि सीआईएफ के जवान वहीं बगल के चेकपोस्ट में अपनी ड्यूटी बजाते हैं और पत्थर तस्कर उनकी आंखों के सामने पत्थरों से भरे ट्रैक्टर ले जाते हैं. जिस प्रकार सीआईएसएफ के जवानों की मौजूदगी में पत्थरों की तस्करी होती है, उससे यह सवाल उठना लाजिमी है कि जवानों की तैनाती पत्थरों की तस्करी रोकने के लिए कराई गई है अथवा लूटाने के लिए.
स्थानीय लोग बताते हैं कि कई महीनो से लगातार खुलेआम पत्थरों की तस्करी हो रही है. लोगों का आरोप है कि आउटसोर्सिंग कंपनी के कुछ अधिकारियों की संलिप्ता से हर रोज सैकड़ो ट्रैक्टर पत्थर निकाले जा रहे हैं. लोगों ने सीआईएसएफ पर भी पत्थरों की तस्करी कराने के मामले में गंभीर आरोप लगाया है.पत्थर माफिया कतरास थाना क्षेत्र के जीटीएस आउटसोर्सिंग कंपनी से ट्रैक्टर में पत्थर भरकर छाताबाद होते हुए भटमुरना मोड पहुंचते हैं. वहां से कुछ ट्रैक्टर सोनारडीह के रास्ते होकर निकलते हैं. वहीं कुछ ट्रैक्टर भटमुरना मोड से कतरास कॉलेज, टंडा बस्ती से श्यामडीह मोड होते हुए फुलवार एवं बेहराकुदर की ओर जाते हैं. कुछ ट्रैक्टर कतरास कॉलेज होते हुए भगतसिंह चौक व राहुल चौक होते हुए श्यामडीह जाते हैं. यही नहीं अधिकांश ट्रैक्टरों में नंबर प्लेट नहीं होता है. ट्रैक्टरों के पॉल्यूशन व फिटनेस का पेपर कितना सही होगा यह तो अधिकारियों के जांच पड़ताल के बाद ही पता चल सकेगा. दिनभर बिना नंबर प्लेट के इन ट्रैक्टरों को कतरास थाना क्षेत्र के इर्द गिर्द दौड़ते हुए देखे जा सकते हैं.
बता दे कि कुछ दिन पहले बिना नम्बर प्लेट का एक बेहद पुराना ट्रैक्टर श्यामडीह सरस्वती शिशु मंदिर के समीप स्थित तालाब में जा गिरा था. जिसे बाद में कतरास पुलिस प्रशासन ने अपने कब्जे में ले लिया था.



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