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एक ही घर से उठीं दो अर्थियां — एक भाई बना शिक्षक, दूसरा नक्सली; दोनों की मौत ने तोड़का गांव को किया गमगीन

एक ही घर से उठीं दो अर्थियां — एक भाई बना शिक्षक, दूसरा नक्सली; दोनों की मौत ने तोड़का गांव को किया गमगीन

छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले के तोड़का गांव में इन दिनों सन्नाटा पसरा है। पिछले ढाई महीने के भीतर एक ही परिवार ने अपने दो बेटों की अर्थियां देखी हैं — एक ने बच्चों को शिक्षित करने के लिए कलम उठाई थी, तो दूसरे ने हथियार थाम लिया था।

पहला बेटा कल्लू ताती, जो गांव के बच्चों को “अ से अनार” सिखाने वाला शिक्षक था, नक्सलियों के शक में उन्हीं के हाथों मारा गया। वहीं, दूसरा बेटा लोकेश ताती, जिसने बचपन में ही नक्सलवाद का रास्ता चुना था, हिड़मा गिरोह के साथ मुठभेड़ में मारा गया। दोनों की मौत के बाद गांव में मातम और खामोशी है।

दो राहें, एक घर

बीजापुर के तोड़का गांव के मंगल ताती के दो बेटे थे — पहली पत्नी सोमली से कल्लू और दूसरी पत्नी लखमे से लोकेश। दोनों एक ही आंगन में पले-बढ़े। पिता ने मेहनत कर दोनों को पढ़ाया, पर रास्ते अलग हो गए —

कल्लू ताती ने शिक्षा का मार्ग चुना, ग्रेजुएट होकर शिक्षक बना।

लोकेश ताती नक्सलवाद की राह पर चल पड़ा और जंगल में शामिल हो गया।

कल्लू बना गांव का शिक्षक

बहन मनीषा ताती बताती हैं — “कल्लू गांव का सबसे पढ़ा-लिखा लड़का था। उसने कहा था कि गांव के बच्चों को शिक्षित कर उनका भविष्य बदलूंगा।”

29 अगस्त को वह रोज की तरह स्कूल गया था। बच्चों को पढ़ाने के बाद दोपहर में घर लौटने की बात कहकर निकला, लेकिन शाम तक नहीं लौटा। कुछ घंटों बाद खबर आई कि नक्सलियों ने मुखबिरी के शक में उसे मौत के घाट उतार दिया।

लोकेश ने चुना नक्सलवाद

दूसरी ओर लोकेश ताती, जो बचपन में ही नक्सलियों के संपर्क में आया, हिड़मा और टेक शंकर जैसे बड़े नक्सल नेताओं के साथ काम करने लगा। उसने कभी घर लौटकर नहीं देखा। हाल ही में सुरक्षा बलों के साथ एनकाउंटर में वह मारा गया।

परिवार ने पहचान के बाद उसका अंतिम संस्कार किया। अब घर में दोनों बेटों की तस्वीरें एक साथ दीवार पर टंगी हैं — एक शिक्षक की, दूसरा नक्सली की।

गांव में पसरा सन्नाटा

दोनों बेटों की मौत ने पूरे तोड़का गांव को हिला दिया है। ग्रामीणों का कहना है कि शिक्षा और हिंसा की यह दो राहें गांव के हर घर को सोचने पर मजबूर कर रही हैं।

एक ही पिता के दो बेटे — एक ने समाज बनाने का रास्ता चुना, दूसरा उसे तोड़ने का। 

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