बिलासपुर रेलवे स्टेशन पर सांड का ‘VIP ट्रीटमेंट’! प्लेटफॉर्म पर बेखौफ घूमते रहे आवारा पशु, यात्री बोले—‘डरिए मत, ये रेल मंत्री के पालतू हैं’
रेलवे के जोनल मुख्यालय में यात्रियों की सुरक्षा पर सवाल; वायरल वीडियो में प्लेटफॉर्म पर घूमता दिखा सांड और आवारा कुत्ता, करीब एक घंटे तक पशुओं की मौजूदगी का दावा
बिलासपुर। रेलवे स्टेशन पर यात्री सुरक्षित सफर की उम्मीद लेकर पहुंचते हैं, लेकिन जब प्लेटफॉर्म पर ही सांड और आवारा कुत्ते बेखौफ घूमते नजर आएं, तो सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठना लाजिमी है। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर रेलवे स्टेशन का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने की जानकारी सामने आई है। इसमें एक सांड और आवारा कुत्ता प्लेटफॉर्म पर घूमते दिखाई दे रहे हैं। इसी दौरान एक यात्री ने तंज कसते हुए कहा— “डरिए मत, ये रेल मंत्री के पालतू हैं।”
यात्री की इस व्यंग्यात्मक टिप्पणी ने रेलवे स्टेशन पर आवारा पशुओं की मौजूदगी और यात्रियों की सुरक्षा को लेकर चर्चा छेड़ दी है। दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के जोनल मुख्यालय वाले बिलासपुर स्टेशन पर इस तरह की स्थिति सामने आने से स्टेशन प्रबंधन की व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं।
प्लेटफॉर्म पर घूमता रहा सांड, यात्रियों में दहशत की आशंका
वायरल वीडियो में सांड और आवारा कुत्ते को प्लेटफॉर्म पर घूमते हुए देखा जा सकता है। स्टेशन पर महिलाओं समेत दूसरे यात्री भी मौजूद थे। ऐसे में अचानक सांड के सामने आ जाने से भगदड़ या किसी यात्री के घायल होने का खतरा पैदा हो सकता है।
विशेष रूप से बच्चों, बुजुर्गों और भारी सामान लेकर चलने वाले यात्रियों के लिए इस तरह की स्थिति जोखिम भरी हो सकती है। दावा किया जा रहा है कि आवारा पशु करीब एक घंटे तक स्टेशन परिसर में घूमते रहे। हालांकि, इस अवधि और घटना के सटीक समय की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
‘डरिए मत, ये रेल मंत्री के पालतू हैं’—यात्री का तंज चर्चा में
स्टेशन पर आवारा पशुओं की मौजूदगी के बीच यात्री की टिप्पणी ने पूरे मामले को व्यंग्यात्मक मोड़ दे दिया। रेल मंत्री के ‘पालतू’ कहने वाला यह तंज रेलवे की व्यवस्थाओं पर सवाल उठाने के लिए इस्तेमाल किया गया।
हालांकि, इस टिप्पणी को वास्तविक तथ्य नहीं, बल्कि यात्री के व्यंग्य के रूप में ही देखा जाना चाहिए। वीडियो में दिख रही स्थिति ने यह सवाल जरूर खड़ा किया है कि यात्रियों की सुरक्षा के लिए जिम्मेदार व्यवस्था के बावजूद आवारा पशु प्लेटफॉर्म तक कैसे पहुंच गए।
रेलवे सुरक्षा कर्मियों की मौजूदगी में कैसे पहुंचे आवारा पशु?
बिलासपुर रेलवे स्टेशन दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे का प्रमुख स्टेशन है। यहां बड़ी संख्या में यात्री ट्रेनों का इंतजार करते हैं और प्रतिदिन आवागमन करते हैं। ऐसे व्यस्त स्टेशन पर सांड जैसे बड़े पशु का प्लेटफॉर्म तक पहुंचना सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था की समीक्षा की जरूरत बताता है।
यदि स्टेशन परिसर में आवारा पशुओं का प्रवेश रोकने की व्यवस्था प्रभावी है, तो फिर ऐसी घटना कैसे हुई? क्या प्रवेश मार्गों पर निगरानी पर्याप्त नहीं है? और पशु प्लेटफॉर्म पर पहुंच जाएं, तो उन्हें सुरक्षित तरीके से हटाने के लिए तत्काल कार्रवाई कौन करता है?
इन सवालों पर रेलवे प्रशासन की ओर से आधिकारिक जवाब सामने आना बाकी है।
यात्रियों की सुरक्षा से खिलवाड़ नहीं होना चाहिए
रेलवे स्टेशन पर यात्रियों को सुरक्षित और सुविधाजनक वातावरण उपलब्ध कराना प्रशासन की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। आवारा पशुओं की मौजूदगी केवल असुविधा का मामला नहीं है, बल्कि इससे यात्रियों के चोटिल होने, सामान गिरने और अचानक अफरा-तफरी मचने का खतरा भी रहता है।
रेलवे प्रशासन को ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए स्टेशन परिसर की नियमित निगरानी, प्रवेश मार्गों की जांच और आवारा पशु दिखाई देने पर तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित करनी चाहिए। साथ ही, यात्रियों को भीड़भाड़ वाले प्लेटफॉर्म पर सतर्क रहने की जरूरत है।
अब रेलवे प्रशासन से जवाब का इंतजार
बिलासपुर रेलवे स्टेशन के वायरल वीडियो ने एक बार फिर स्टेशन परिसर में आवारा पशुओं के प्रवेश और यात्रियों की सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े किए हैं। अब देखना होगा कि दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे प्रशासन इस मामले में क्या कदम उठाता है और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए क्या व्यवस्था करता है।
बड़ा सवाल यही है—जब रेलवे स्टेशन यात्रियों की सुरक्षा के लिए है, तो प्लेटफॉर्म पर सांड बेखौफ कैसे घूमता रहा?
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