दिवाली की ऑनलाइन शॉपिंग में रहें सावधान! सस्ते ऑफर के चक्कर में खाली हो सकता है बैंक खाता, ऐसे बचें साइबर ठगी से
दिवाली नजदीक आते ही ऑनलाइन खरीदारी और आकर्षक डिस्काउंट का दौर तेज होने लगता है। लेकिन फर्जी वेबसाइट, नकली शॉपिंग लिंक, WhatsApp ऑफर और UPI के जरिए होने वाली साइबर ठगी से सावधान रहना भी जरूरी है। आपकी एक छोटी सी लापरवाही मेहनत की कमाई पर भारी पड़ सकती है।
दिवाली की खरीदारी करते समय ऑनलाइन ऑफर की सत्यता जरूर जांचें।
दिवाली की खरीदारी में कहीं आप भी तो नहीं कर रहे ये गलती?
त्योहारों के मौसम में लोग कपड़े, मोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स, घरेलू सामान और उपहार खरीदने के लिए ऑनलाइन प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करते हैं। ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए बड़ी छूट, कैशबैक और सीमित समय के ऑफर दिखाए जाते हैं। साइबर अपराधी भी इसी अवसर का फायदा उठाकर असली कंपनियों जैसी दिखने वाली फर्जी वेबसाइट और लिंक के जरिए लोगों को निशाना बना सकते हैं।
सोशल मीडिया या WhatsApp पर बेहद कम कीमत में महंगे सामान देने, मुफ्त गिफ्ट मिलने या विशेष दिवाली कूपन का दावा करने वाले संदेश आ सकते हैं। बिना जांच किए ऐसे लिंक पर क्लिक करना या भुगतान करना नुकसान का कारण बन सकता है।
इन 7 तरीकों से साइबर ठग बना सकते हैं निशाना
1. फर्जी शॉपिंग वेबसाइट
असली ई-कॉमर्स वेबसाइट जैसी दिखने वाली नकली साइट पर भुगतान करने के बाद सामान नहीं मिलता। खरीदारी से पहले वेबसाइट का सही पता और विक्रेता की विश्वसनीयता जांचें।2. WhatsApp पर नकली ऑफर
दिवाली गिफ्ट, मुफ्त स्मार्टफोन, भारी डिस्काउंट या विशेष कूपन के नाम पर संदिग्ध लिंक भेजे जा सकते हैं। अनजान लिंक खोलने या निजी जानकारी भरने से बचें।3. UPI पेमेंट की चाल
पैसे प्राप्त करने के नाम पर भेजी गई अनजान कलेक्ट रिक्वेस्ट स्वीकार न करें। UPI PIN डालने से पहले भुगतान की रकम और प्राप्तकर्ता की जानकारी जांचें।4. नकली कस्टमर केयर
इंटरनेट पर मिले फर्जी हेल्पलाइन नंबर पर संपर्क करने से ठग बैंक विवरण, OTP या स्क्रीन शेयरिंग ऐप की जानकारी मांग सकते हैं। सहायता के लिए आधिकारिक वेबसाइट या ऐप का ही उपयोग करें।5. QR कोड के जरिए धोखाधड़ी
किसी से पैसा प्राप्त करने के लिए सामान्यतः QR कोड स्कैन कर UPI PIN डालने की जरूरत नहीं होती। भुगतान की प्रक्रिया समझे बिना QR कोड स्कैन न करें।6. नकली डिलीवरी या रिफंड लिंक
पार्सल अटकने, पता अपडेट करने या रिफंड पाने के नाम पर संदिग्ध लिंक भेजे जा सकते हैं। ऐसे लिंक पर बैंकिंग जानकारी दर्ज न करें।7. फर्जी गिफ्ट और लकी ड्रॉ
दिवाली बोनस, लकी ड्रॉ या कम समय में पैसे दोगुने करने के दावों पर भरोसा करने से पहले उनकी सत्यता जांचें। इनाम पाने के नाम पर अनजान खाते में पैसे न भेजें।ऑनलाइन शॉपिंग करते समय अपनाएं ये 10 सुरक्षा टिप्स
- खरीदारी के लिए आधिकारिक वेबसाइट या विश्वसनीय ऐप का इस्तेमाल करें।
- वेबसाइट का सही डोमेन नाम जांचें। केवल HTTPS या ताले का निशान देखकर वेबसाइट को सुरक्षित न मानें।
- बाजार से बहुत कम कीमत पर महंगे सामान मिलने के दावे पर सावधानी बरतें।
- OTP, UPI PIN, ATM PIN, CVV और पासवर्ड किसी के साथ साझा न करें।
- अनजान व्यक्ति के कहने पर स्क्रीन शेयरिंग या रिमोट एक्सेस ऐप इंस्टॉल न करें।
- भुगतान से पहले व्यापारी का नाम, रकम और UPI विवरण जांचें।
- सार्वजनिक Wi-Fi पर बैंकिंग और भुगतान करने से बचें।
- मोबाइल, शॉपिंग ऐप और बैंकिंग ऐप अपडेट रखें तथा लेन-देन के अलर्ट चालू रखें।
- अनजान QR कोड स्कैन करने और संदिग्ध APK फाइल डाउनलोड करने से बचें।
- ऑर्डर की रसीद, भुगतान का रिकॉर्ड और ट्रांजैक्शन आईडी सुरक्षित रखें।
साइबर ठगी हो जाए तो तुरंत क्या करें?
अगर ऑनलाइन शॉपिंग या डिजिटल भुगतान के दौरान आपके साथ साइबर ठगी हो जाती है, तो घबराने के बजाय तुरंत कार्रवाई करें। समय पर शिकायत करने से संबंधित एजेंसियों को रकम के आगे ट्रांसफर को रोकने के प्रयास में मदद मिल सकती है।
- साइबर शिकायत दर्ज करें: राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत दर्ज करें।
- बैंक को सूचना दें: अपने बैंक या भुगतान सेवा प्रदाता से तुरंत संपर्क करें और संदिग्ध लेन-देन की जानकारी दें।
- सबूत सुरक्षित रखें: ट्रांजैक्शन आईडी, भुगतान की रसीद, चैट, मोबाइल नंबर, वेबसाइट लिंक और स्क्रीनशॉट संभालकर रखें।
- खाते की सुरक्षा करें: जरूरत पड़ने पर बैंक से कार्ड, खाते या भुगतान सुविधा को सुरक्षित करने के लिए कहें और प्रभावित पासवर्ड बदलें।
ध्यान दें: शिकायत दर्ज कराने से रकम वापस मिलने की गारंटी नहीं होती। इसलिए देरी किए बिना बैंक और संबंधित साइबर हेल्पलाइन को सूचना दें।
दिवाली की खुशियां मनाएं, साइबर ठगों को मौका न दें
दिवाली रोशनी, खुशियों और खरीदारी का त्योहार है। लेकिन आकर्षक ऑफर के लालच में जल्दबाजी करना आपकी आर्थिक सुरक्षा के लिए जोखिम बन सकता है। किसी भी लिंक पर क्लिक करने, भुगतान करने या निजी जानकारी साझा करने से पहले उसकी सत्यता जांचें।
अपने परिवार के बुजुर्गों, बच्चों और ऑनलाइन खरीदारी करने वाले परिचितों को भी इन सावधानियों के बारे में बताएं। जागरूकता और सतर्कता से साइबर ठगी का खतरा कम किया जा सकता है।
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