शिक्षा के मंदिर का इतना बुरा हाल हो सकता है यह कभी नहीं सोचा था. बीसीसीएल के अनुदान से संचालित स्कूल खंडहर में तब्दील हो जाएगी यह किसी ने भी नहीं सोचा होगा. जी हां तस्वीर में आप जो खंडहर देख रहे हैं दरअसल वह खंडहर नहीं बल्कि बीसीसीएल के अनुदान से चलने वाली स्कूल है, जिसका नाम शिशु विद्या मंदिर कांटापहाड़ी है. हालांकि कांटापहाड़ी तो अब उत्खनन स्थल बन गया है जहां आउटसोर्सिंग कंपनी खनन कार्य कर रही है. लेकिन आज से लगभग 25 साल पहले 1999 में यह स्कूल वहां से हटाकर कतरास के श्यामडीह के समीप हीरक रोड के किनारे स्थित बीसीसीएल एरिया 4 अंतर्गत कोलडंप कॉलोनी में स्थानांतरित कर दिया गया.
स्कूल में नियुक्त शिक्षकों के अनुसार कोरोना के पहले तक यह स्कूल ठीक-ठाक चलता रहा, लेकिन कोरोना के बाद बच्चों के अभाव में यह स्कूल पूरी तरह से बंद हो गया. पत्रकारों की टीम जब उक्त स्कूल का मुआयना करने पहुंची तो पाया कि दीवाल पर लिखा स्कूल का नाम पूरी तरह से मिट चुका है. ऐसा लग रहा था, जैसे कई वर्षों से रंग रोगन का कार्य भी नहीं किया गया है. स्कूल के बरामदे में मकड़ा और अन्य कीट पतंगों ने अपना आशियाना बना रखा है. स्कूल में लगे तालों में जंग लग गया है. आसपास के कुछ लोगों ने बताया कि कई वर्षों से स्कूल बंद है. ना तो यहां बच्चे पढ़ने आते हैं ना ही उन्हें पढ़ाने कोई शिक्षक. पत्रकारों को देखकर स्कूल में नियुक्त दोनों शिक्षक सत्यनारायण यादव एवं मनीष पांडे पहुंचे. दोनों शिक्षकों ने पत्रकारों को बताया कि कोरोना के पहले स्कूल ठीक-ठाक चला रहा लेकिन कोरोना के बाद से बच्चों के अभाव में यह स्कूल बंद हो गया.
शिक्षकों ने बताया कि उन लोगों का मानदेय 2020 से बंद कर दिया है. जैसे तैसे यहां वहां ट्यूशन पढ़कर अपना गुजर बसर कर रहे हैं. हालांकि बीसीसीएल की ओर से उन्हें अभी भी बीसीसीएल क्वार्टर का लाभ दिया जा रहा है. पिछले वर्ष फरवरी 2023 में एरिया 4 के एडमिनिस्ट्रेशन डिपार्टमेंट के अधिकारी सौरव सिंह एवं कोयला भवन से कई अधिकारी स्कूल का जाँच करने पहुँचे थे. लेकिन स्कूल का दशा सुधारने एवं पुनः स्कूल को संचालित करने में बीसीसीएल की ओर से कोई सहयोग नही किया जा रहा है. इसको लेकर कई बार कोयला भवन में प्रदर्शन भी किया गया है.

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