सीएमडी सहित अधिकारियों, नेताओ व शहीद के परिजनों ने शहीदों को नम आँखों से दी श्रद्धांजलि
कतरास: 26-09-2024
‘शहीदों की चिताओं पर लगेंगे हर बरस मेले, वतन पर मरने वालों का यही बाकी निशां होगा...
शहीद के स्मारक को देखकर यह पंक्तियां बरबस ही याद हो उठती है. आज के ही दिन 26 सितंबर 1995 को प्राकृतिक आपदा के कारण गजलीटाँड़ खान हादसे में 64 कोल कर्मियों ने खदान में ही जल समाधि ले ली थी. तब से अब तक प्रतिवर्ष आज के दिन बीसीसीएल के अधिकारियों, समाजसेवियों, नेताओं व शहीदों के परिजन शहीद की बेदी पर श्रद्धांजलि देते आ रहे हैं.
आज समाधि स्थल पर बीसीसीएल सीएमडी समीरन दत्ता, कतरास क्षेत्र के महाप्रबंधक, बियाड़ा के पूर्व अध्यक्ष विजय कुमार झा, टुंडी विधायक मथुरा प्रसाद महतो, पूर्व मंत्री जलेश्वर महतो, सांसद प्रतिनिधि शत्रुघ्न महतो, पूर्व सांसद रविन्द्र कुमार पांडे, जनशक्ति दल के अध्यक्ष सूरज महतो, राजद नेता विनय पासवान, मजदूर नेता राजेंद्र प्रसाद राजा, जोगता नागरिक समिति के अध्यक्ष पलटू सिन्हा सहित बीसीसीएल के दर्जनों अधिकारियों एवं शहीद के परिजनों ने शहीद की बेदी पर माल्यार्पण कर शहीदों को श्रद्धांजलि दी. सीएमडी ने शहीद स्मृति उद्यान में वृक्षारोपण किया तथा मीडिया से बातचीत करते हुए 28 साल पहले हुए हादसा पर खेत व्यक्त करते हुए कहा कि इस तरह की दर्दनाक घटनाएं न हो इसके लिए बीसीसीएल अलर्ट मोड में काम कर रही है. सुरक्षित माइनिंग को लेकर बीसीसीएल संकल्पित है.
गजलीटाँड़ खान हादसे को याद करके आज भी सिहर उठता है कोयलांचल वासियों का दिल
29 साल पहले आज के ही दिन 26 सिंतबर 1995 को बीसीसीएल एरिया 4 के गजलीटांड़ कोलयरी के 6 नंबर पिट में बड़ी खान दुर्घटना हुई थी. भारी बारिश के बाद 6 नंबर पिट में पानी भर गया था. इस हादसे में पिट नंबर 6 में काम करने वाले 64 कोल कर्मियों की उसी में समाधि बन गई थी. तब से हर साल 26 सितंबर के दिन उन्हीं कोल कर्मियों की याद में यहां श्रद्धांजलि सभा होती है. पुष्पांजलि अर्पित कर शहीदों को और उस मार्मिक घटना को अधिकारी याद तो करते हैं. परन्तु 28 बर्ष बीत जाने के बावजूद भी हादसे की गुत्थी अब तक नही सुलझी है. इस घटना के लिए जहाँ अधिकांश नेता बीसीसीएल को जिम्मेदार ठहराते हुए उसे कटघरे में खड़ा करते हैं. वहीं बीसीसीएल अपना अलग ही राग अलापती है. बियाडा के पूर्व अध्यक्ष विजय कुमार झा ने बताया कि मुखर्जी का रिपोर्ट 29 साल बीतने के बाद भी अभी तक खुलासा नहीं हो पाया है. यह एक मानवीय भूल थी. आईएमडी की रिपोर्ट में स्पष्ट था कि उसे दिन अधिकतम बारिश होगी किंतु बीसीसीएल द्वारा उस रिपोर्ट को अनसुना करके श्रमिकों को काम करने के लिए खदान के अंदर भेज कर खतरे में डाला गया, जिसका परिणाम अत्यंत दुखद हुआ.




Post a Comment
0 Comments