वंदे मातरम्’ को लेकर गृह मंत्रालय की नई गाइडलाइन, सरकारी कार्यक्रमों में खड़ा होना जरूरी
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केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ को लेकर एक नया, विस्तृत आधिकारिक प्रोटोकॉल जारी किया है, जिसमें अब सरकारी कार्यक्रमों, स्कूलों और औपचारिक आयोजनों में ‘वंदे मातरम्’ को अनिवार्य रूप से गाना या बजाना कहा गया है।
यह आदेश गृह मंत्रालय द्वारा जारी किया गया है और इसका मकसद ‘वंदे मातरम्’ को राष्ट्रगान की तरह सम्मान, औपचारिकता और एक सुनिश्चित प्रोटोकॉल देना है।
नए नियम – क्या बदलाव हुआ है?
🇮🇳 1. ‘वंदे मातरम्’ अब अनिवार्य
सरकारी कार्यक्रमों, कार्यालयों, औपचारिक आयोजनों और स्कूलों में ‘वंदे मातरम्’ का गाना/बजाना अनिवार्य होगा।
2. पूरा गीत (6 छंद) गाना/बजाना
अब तक अक्सर सिर्फ गीत के पहले दो छंद ही गाए जाते थे, लेकिन नए निर्देश के अनुसार सारे छह छंद (3 मिनट 10 सेकेंड) पूरे गाए या बजाए जाएंगे।
3. ‘जन गण मन’ से पहले
अगर ‘वंदे मातरम्’ और राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ दोनों एक ही कार्यक्रम में बजते हैं, तो पहले ‘वंदे मातरम्’ बजाया जाएगा और उसके बाद ही राष्ट्रगान।
वंदे मातरम्’ को लेकर गृह मंत्रालय की नई गाइडलाइन, सरकारी कार्यक्रमों में खड़ा होना जरूरी
4. खड़े होना अनिवार्य
गीत के बजने या गाए जाने के दौरान सभी उपस्थित लोगों को सावधान मुद्रा (खड़े रहना) अपनाना अनिवार्य होगा — ठीक उसी तरह जैसे राष्ट्रगान के समय किया जाता है।
5. स्कूलों में शुरुआत इसी के साथ
स्कूलों में अब दिन की शुरुआत ‘वंदे मातरम्’ से की जाएगी, और फिर आगे कार्यक्रम/पढ़ाई शुरू होगी।
नियम का ऐतिहासिक और वर्तमान संदर्भ
ये नियम ‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में बनाए गए हैं। 1875 में बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने इसे लिखा था, और स्वतंत्रता संग्राम के दौरान यह गीत भारतीयों में देशभक्ति की भावना जगाने वाला एक शक्तिशाली गीत रहा।
पहले ‘वंदे मातरम्’ को लेकर कोई स्पष्ट प्रोटोकॉल नहीं था, लेकिन अब गृह मंत्रालय ने पहली बार ऐसा आधिकारिक आदेश जारी किया है, ताकि सम्मान, एकरूपता और आदर का एक मानकीकृत ढांचा स्थापित किया जा सके।
नए आदेश की प्रतिक्रिया और प्रभाव
सरकार का कहना है कि यह निर्णय “राष्ट्रगीत के सम्मान को और अधिक औपचारिक मान्यता देना” है और इससे राष्ट्रीय प्रतीकों के प्रति सम्मान बढ़ेगा।
हालांकि, कुछ विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह के अनिवार्य नियमों से राजनीति, सांस्कृतिक पहचान और राष्ट्रीयता की परिभाषा पर बहसें और सामने आ सकती हैं।
नए नियम किन कार्यक्रमों में लागू होंगे?
➡️ सरकारी समारोह
➡️ स्कूलों/कॉलेजों की राजकीय सभाएँ
➡️ राष्ट्रपति/राज्यपाल के कार्यक्रम
➡️ पद्म पुरस्कार समारोह और सम्मान कार्यक्रम
➡️ राष्ट्रीय आयोजनों में प्रस्तुतियाँ
इन सभी में ‘वंदे मातरम्’ को पहले बजाया/गाया जाएगा, इसके बाद ही अन्य कार्यक्रम शुरू होंगे।
यह नियम सिनेमा हॉल जैसी जगहों पर गीत बजने पर खड़े रहने की अनिवार्यता नहीं भी रखता है, ताकि दर्शकों की सुविधा प्रभावित न हो।
केंद्र सरकार के नवीनतम दिशानिर्देश ‘वंदे मातरम्’ को मात्र एक गीत से बढ़कर राष्ट्रीय सम्मान और औपचारिक प्रतीक के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक बड़ा कदम हैं। अब यह न केवल सरकारी आयोजनों का हिस्सा होगा, बल्कि एक सुव्यवस्थित अनुशासनिक और सांस्कृतिक प्रोटोकॉल के तहत भी प्रस्तुत किया जाएगा।





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