बिलासपुर में अवैध प्लॉटिंग का बड़ा खेल, प्रशासन की चुप्पी पर उठे सवाल
बिना अनुमति चल रहा कॉलोनी निर्माण, नियमों की खुली अनदेखी
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बिलासपुर जिले के सकरी तहसील अंतर्गत ग्राम परसदा में अवैध प्लॉटिंग और कॉलोनी निर्माण का गंभीर मामला सामने आया है। ग्रामीणों द्वारा कलेक्टर को सौंपे गए ज्ञापन में आरोप लगाया गया है कि बिना ले-आउट स्वीकृति, बिना रेरा पंजीयन और बिना ग्राम पंचायत की अनुमति के कृषि भूमि को छोटे-छोटे प्लॉट में काटकर बेचा जा रहा है और निर्माण कार्य लगातार जारी है।
शिकायत में रियल स्टेट संचालक राजेश कुमार का नाम सामने आया है, जबकि आरोप है कि इस कॉलोनी का निर्माण जनपद सदस्य अरुण कुमार लौंडिया द्वारा कराया जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि नियमों को दरकिनार कर यह पूरा काम किया जा रहा है, जिससे प्रशासन की भूमिका भी सवालों के घेरे में आ गई है।
ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया है कि कॉलोनी से निकलने वाला गंदा पानी सीधे गांव के सार्वजनिक तालाब में छोड़ा जा रहा है, जिससे जल प्रदूषण फैल रहा है और गांव के लोगों के स्वास्थ्य पर खतरा मंडरा रहा है। इसके बावजूद संबंधित विभागों द्वारा अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। मामले में यह भी सामने आया है कि ग्राम पंचायत या ग्राम सभा से किसी प्रकार की अनुमति नहीं ली गई है। ऐसे में यह सवाल उठता है कि बिना स्थानीय स्वीकृति के इतना बड़ा निर्माण कार्य कैसे हो रहा है और क्या प्रशासन को इसकी जानकारी नहीं है या जानबूझकर अनदेखी की जा रही है। शिकायत में शासकीय भूमि पर कब्जा कर उसे निजी भूमि बताकर बेचने का भी आरोप लगाया गया है। यदि यह सही है तो यह सीधे तौर पर सरकारी जमीन पर अतिक्रमण और राजस्व हानि का गंभीर मामला बनता है। ग्रामीणों द्वारा 30 मार्च 2026 को कलेक्टर कार्यालय में ज्ञापन सौंपा गया है, जिसमें अवैध प्लॉटिंग पर तत्काल रोक लगाने, निर्माण कार्य को हटाने, कॉलोनी को अवैध घोषित करने और संबंधित लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की गई है। साथ ही जमीन की खरीद-फरोख्त और नामांतरण पर भी तत्काल रोक लगाने की बात कही गई है। इतने गंभीर आरोपों के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई सामने नहीं आने से प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं। क्या यह केवल लापरवाही है या फिर इसके पीछे किसी प्रकार की मिलीभगत काम कर रही है, यह जांच का विषय है।
अब देखना यह है कि प्रशासन इस मामले में सख्त कार्रवाई करता है या फिर यह मामला भी अन्य मामलों की तरह फाइलों में दबकर रह जाएगा।







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