छत्तीसगढ़: नसबंदी कांड में डॉक्टर दोषी, 15 महिलाओं की मौत पर 2 साल की सजा
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बिलासपुर | विशेष रिपोर्ट | छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में वर्ष 2014 के चर्चित नसबंदी कांड में अदालत ने बड़ा फैसला सुनाते हुए एक चिकित्सक को दोषी करार दिया है। इस मामले में नसबंदी सर्जरी के बाद 15 महिलाओं की मौत हुई थी, जिसने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया था।
प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश शैलेष कुमार केतारप की अदालत ने चिकित्सक डॉ. आरके गुप्ता को गैर इरादतन हत्या का दोषी मानते हुए दो साल के कारावास की सजा सुनाई है।
अतिरिक्त लोक अभियोजक देवेंद्र राव के अनुसार:
प्रत्येक मृत महिला के लिए ₹25,000 का जुर्माना लगाया गया
अन्य धाराओं में भी सजा:
6 महीने की सजा + ₹500 जुर्माना
1 महीने की सजा + ₹100 जुर्माना
सभी सजाएं एक साथ चलेंगी
सजा 3 साल से कम होने के कारण डॉ. गुप्ता को जमानत मिल गई
क्या था पूरा मामला?
यह घटना 8 नवंबर 2014 की है, जब बिलासपुर जिले के तखतपुर ब्लॉक के सकरी क्षेत्र के पास पेंडारी स्थित एक निजी अस्पताल में नसबंदी शिविर लगाया गया था।
शिविर में 83 महिलाओं का ऑपरेशन किया गया
आरोप है कि डॉ. गुप्ता ने सिर्फ 3 घंटे में सभी सर्जरी कर दीं
ऑपरेशन के बाद कई महिलाएं गंभीर रूप से बीमार हो गईं
इलाज के दौरान 15 महिलाओं की मौत हो गई
जांच में सामने आईं बड़ी लापरवाहियां
अभियोजन के अनुसार:
ऑपरेशन में भारी लापरवाही
संक्रमण (सेप्टीसीमिया) फैलने के संकेत
ऑपरेशन के बाद दी गई दवा ‘सिप्रोसिन’ में चूहामार ज़हर की मिलावट का विवाद
इन गंभीर आरोपों के आधार पर पुलिस ने डॉक्टर समेत दवा कंपनियों से जुड़े लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया था।
मामले में शामिल दवा कंपनियों के 5 आरोपियों को अदालत ने सबूत के अभाव में बरी कर दिया।
यह मामला देश के सबसे चर्चित मेडिकल लापरवाही मामलों में से एक रहा है। अदालत का यह फैसला स्वास्थ्य सेवाओं में जिम्मेदारी और सुरक्षा मानकों को लेकर एक महत्वपूर्ण संदेश देता है।


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