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बिलासपुर में अवैध उत्खनन पर बड़ी कार्रवाई… लेकिन संरक्षण किसका? आखिर खनन माफियाओं को हिम्मत कहां से मिल रही है?

बिलासपुर में अवैध उत्खनन पर बड़ी कार्रवाई… लेकिन संरक्षण किसका? आखिर खनन माफियाओं को हिम्मत कहां से मिल रही है?


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बिलासपुर में खनिज विभाग ने अवैध उत्खनन और परिवहन के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए 2 पोकलेन मशीन, 1 जेसीबी और 20 वाहनों को जब्त किया है। कलेक्टर संजय अग्रवाल के निर्देश और खनिज विभाग की टीम की कार्रवाई को प्रशासन बड़ी सफलता मान रहा है, लेकिन इस कार्रवाई ने कई बड़े सवाल भी खड़े कर दिए हैं। सवाल सिर्फ अवैध रेत, मुरूम और खनिज परिवहन का नहीं है… सवाल उस पूरे सिस्टम का है जिसके बीच यह खेल महीनों से चलता रहा।

खनिज विभाग के अनुसार 7 मई से 20 मई 2026 के बीच जिले के चकरभाठा, बोदरी, सकरी, बेलगहना, रतनखंडी, करहीकछार, सलका, पोड़ी, महमंद, लालखदान, मंगला, मस्तूरी, चौरमट्टी और लखराम सहित कई क्षेत्रों में जांच अभियान चलाया गया। कार्रवाई के दौरान 12 हाईवा, 7 ट्रैक्टर और 1 माजदा वाहन जब्त किए गए। वहीं स्वीकृत क्षेत्र के बाहर रेत उत्खनन करते पाए जाने पर ग्राम सोढ़खुर्द और करहीकछार से 2 पोकलेन मशीनें तथा चौरमट्टी क्षेत्र से अवैध मुरूम उत्खनन में लगी एक जेसीबी मशीन जब्त की गई। महमंद क्षेत्र में बिना वैध अभिवहन पास रेत परिवहन करते पाए गए दो हाईवा वाहनों पर भी कार्रवाई हुई, जिनमें से एक वाहन चालक वाहन छोड़कर फरार हो गया और संबंधित वाहन मालिक के खिलाफ थाना तोरवा में एफआईआर दर्ज कराई गई है। लेकिन अब सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि आखिर इतने बड़े स्तर पर अवैध उत्खनन और परिवहन हो कैसे रहा था? क्या रात के अंधेरे में नदी घाटों पर चल रही पोकलेन मशीनें किसी को दिखाई नहीं देतीं? क्या दिन-रात दौड़ते हाईवा और ट्रैक्टर प्रशासन की नजर से बाहर रहते हैं? या फिर इस पूरे खेल को कहीं न कहीं संरक्षण प्राप्त है? बिलासपुर में पिछले कई महीनों से लगातार अवैध खनन की शिकायतें सामने आती रही हैं। स्थानीय लोगों द्वारा कई बार आरोप लगाए गए कि रात में नदी घाटों से खुलेआम रेत निकाली जाती है और बिना रॉयल्टी वाहन सड़कों पर दौड़ते हैं। कई क्षेत्रों में ग्रामीणों ने नदी के अस्तित्व पर खतरा और पर्यावरण नुकसान की शिकायतें भी कीं। इसके बावजूद यदि कार्रवाई लगातार शिकायतों के बाद होती है, तो सवाल उठना स्वाभाविक है कि आखिर जिम्मेदार विभाग पहले सक्रिय क्यों नहीं दिखते? जनता के बीच अब यह चर्चा भी तेज हो चुकी है कि बिना संरक्षण के इतना बड़ा अवैध कारोबार संभव नहीं हो सकता। क्योंकि जहां पोकलेन मशीनें, जेसीबी, हाईवा और ट्रैक्टर लगातार काम कर रहे हों, वहां स्थानीय स्तर पर किसी को जानकारी न होना बेहद मुश्किल माना जाता है। यही वजह है कि लोग अब सिर्फ छोटे वाहन चालकों पर कार्रवाई नहीं, बल्कि पूरे नेटवर्क और संरक्षण देने वालों तक जांच पहुंचाने की मांग कर रहे हैं। यह भी पहली बार नहीं है जब बिलासपुर में अवैध उत्खनन को लेकर कार्रवाई हुई हो। पिछले छह महीनों में अलग-अलग क्षेत्रों से अवैध रेत और मुरूम परिवहन की शिकायतें सामने आती रही हैं। कई बार वाहनों की जब्ती हुई, एफआईआर दर्ज हुई, लेकिन कुछ दिनों बाद फिर वही खेल शुरू होने के आरोप लगते रहे। इससे लोगों के बीच यह धारणा मजबूत होती जा रही है कि कार्रवाई केवल दिखावे तक सीमित न रह जाए। खनन माफियाओं के बढ़ते हौसले अब प्रशासन के लिए भी चुनौती बनते जा रहे हैं। प्रदेश के कई हिस्सों में अवैध खनन रोकने गई टीमों पर हमले तक की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। ऐसे में यह जरूरी हो जाता है कि सिर्फ वाहन जब्त करने तक कार्रवाई सीमित न रहे, बल्कि उन लोगों की भी पहचान हो जो इस पूरे अवैध नेटवर्क को संरक्षण देकर करोड़ों के कारोबार को चलाने में मदद कर रहे हैं। फिलहाल प्रशासन सख्ती का दावा कर रहा है और जिला स्तरीय टास्क फोर्स को लगातार कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। लेकिन बिलासपुर की जनता अब यह जानना चाहती है कि आखिर इस अवैध उत्खनन के पीछे कौन लोग हैं, उन्हें संरक्षण कौन दे रहा है और क्या इस बार कार्रवाई सच में बड़े चेहरों तक पहुंचेगी या फिर कुछ दिनों बाद सब पहले जैसा हो जाएगा।

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