80s की ट्रेंडिंग AI फोटो: खूबसूरत यादों के साथ छिपे हैं नुकसान, बड़े नेता-मंत्री भी शामिल; भारत में 1 अरब से ज्यादा AI विजुअल
नई दिल्ली। सोशल मीडिया पर इन दिनों 80s यानी 1980 के दशक के अंदाज में AI से तैयार की गई तस्वीरों का ट्रेंड तेजी से वायरल हो रहा है। लोग अपनी सामान्य तस्वीरों को AI की मदद से पुराने दौर के कपड़ों, हेयरस्टाइल, रंगों, कैमरा इफेक्ट और उस समय के माहौल में बदलकर सोशल मीडिया पर शेयर कर रहे हैं। देखते ही देखते यह ट्रेंड आम सोशल मीडिया यूजर्स से निकलकर राजनीतिक और सार्वजनिक जीवन से जुड़े लोगों तक पहुंच गया है। कई बड़े नेता और मंत्री भी रेट्रो अंदाज में तैयार की गई AI तस्वीरें सोशल मीडिया पर साझा करते नजर आए हैं। लेकिन इस खूबसूरत और यादों से जुड़े ट्रेंड के बीच अब एक अहम सवाल भी खड़ा हो रहा है—क्या AI से अपनी तस्वीर बनवाने के लिए उसे किसी प्लेटफॉर्म पर अपलोड करना पूरी तरह सुरक्षित है?
AI से तस्वीरें बनाने का चलन भारत में तेजी से बढ़ा है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, ChatGPT Images 2.0 के जरिए भारत में 1 अरब से ज्यादा AI-generated visuals बनाए जा चुके हैं। हालांकि यह स्पष्ट करना जरूरी है कि यह आंकड़ा सोशल मीडिया पर अपलोड की गई AI तस्वीरों की संख्या नहीं है, बल्कि एक AI प्लेटफॉर्म पर बनाए गए विजुअल्स का आंकड़ा है। भारत में सभी AI प्लेटफॉर्म और सोशल मीडिया पर अब तक कितनी AI तस्वीरें बनाई या अपलोड की गई हैं, इसका कोई विश्वसनीय आधिकारिक कुल आंकड़ा उपलब्ध नहीं है। फिर भी यह संख्या बताती है कि देश में AI-generated content कितनी तेजी से लोगों के बीच लोकप्रिय हो रहा है। इस ट्रेंड की खास बात यह है कि इसमें सिर्फ युवा या आम सोशल मीडिया यूजर्स ही नहीं हैं। कई चर्चित सार्वजनिक हस्तियां और राजनीतिक चेहरे भी AI से तैयार की गई रेट्रो तस्वीरों को सोशल मीडिया पर साझा कर चुके हैं। इससे इस ट्रेंड को और ज्यादा लोकप्रियता मिली है। जब कोई बड़ा सार्वजनिक चेहरा किसी तकनीक या ट्रेंड का इस्तेमाल करता है, तो आम लोगों के बीच भी उसके प्रति भरोसा बढ़ना स्वाभाविक है। यहीं से सवाल और महत्वपूर्ण हो जाता है—अगर बड़े नेता-मंत्री भी AI से अपनी तस्वीरें तैयार करवा रहे हैं, तो क्या आम नागरिक यह मान लें कि अपनी निजी तस्वीर किसी भी AI ऐप या वेबसाइट पर अपलोड करना सुरक्षित है? AI तस्वीर बनाना अपने आप में कोई गलत काम नहीं है। यह तकनीक रचनात्मकता और मनोरंजन के लिए उपयोगी है। लेकिन किसी AI सेवा को फोटो देने से पहले यह समझना जरूरी है कि हम अपनी तस्वीर किस प्लेटफॉर्म को दे रहे हैं और उस तस्वीर के साथ क्या होता है। निजी तस्वीर का अनधिकृत इस्तेमाल, चेहरे की तस्वीर का गलत उपयोग, AI-generated फर्जी तस्वीरें और डीपफेक, किसी व्यक्ति की पहचान का दुरुपयोग, डेटा की सुरक्षा से जुड़े सवाल और फोटो को भविष्य में किसी दूसरे उद्देश्य के लिए इस्तेमाल किए जाने की संभावना जैसे संभावित जोखिमों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। हर AI प्लेटफॉर्म की नीति अलग हो सकती है, इसलिए किसी भी ऐप या वेबसाइट पर फोटो अपलोड करने से पहले उसकी Privacy Policy और Terms of Service पढ़ना जरूरी है। आज के दौर में चेहरे की तस्वीर केवल एक फोटो नहीं रह गई है। AI और फेस-रिकग्निशन तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल के साथ चेहरे से जुड़ा डेटा भी महत्वपूर्ण हो गया है। यही वजह है कि किसी अनजान या अविश्वसनीय प्लेटफॉर्म पर हाई-क्वालिटी निजी फोटो अपलोड करते समय सावधानी जरूरी है। खासकर ऐसी तस्वीरें जिनमें बच्चों, परिवार के सदस्यों, घर के अंदरूनी हिस्से, पहचान संबंधी दस्तावेज या अन्य निजी जानकारी दिखाई दे रही हो, उन्हें AI प्लेटफॉर्म पर अपलोड करने से बचना बेहतर है। AI तकनीक के साथ सबसे बड़ी चिंताओं में से एक डीपफेक और फर्जी कंटेंट भी है। किसी व्यक्ति की तस्वीर उपलब्ध होने के बाद तकनीक की मदद से उसके चेहरे का इस्तेमाल दूसरी तस्वीर या वीडियो में किया जा सकता है। हालांकि हर AI फोटो डीपफेक नहीं होती और हर फोटो का गलत इस्तेमाल होगा, ऐसा भी नहीं कहा जा सकता। लेकिन तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल के साथ इस संभावना को पूरी तरह नजरअंदाज करना भी सही नहीं होगा। यह मुद्दा किसी एक राजनीतिक दल या किसी एक नेता पर आरोप लगाने का नहीं है। सवाल इससे कहीं बड़ा है। जब AI आम जनता के बीच इतनी तेजी से पहुंच रहा है और बड़ी संख्या में लोग अपनी तस्वीरों के साथ प्रयोग कर रहे हैं, तो क्या सरकार, तकनीकी कंपनियों और जनप्रतिनिधियों की जिम्मेदारी नहीं बनती कि लोगों को इसके फायदे के साथ-साथ संभावित जोखिमों के बारे में भी जागरूक किया जाए? अगर कोई ट्रेंड सोशल मीडिया पर तेजी से लोकप्रिय हो रहा है, तो उसके साथ डिजिटल सुरक्षा और प्राइवेसी की जानकारी भी लोगों तक पहुंचनी चाहिए। 80s की AI फोटो बनाना निश्चित तौर पर लोगों के लिए मनोरंजन और पुरानी यादों को नए अंदाज में देखने का एक तरीका है। लोग अपने माता-पिता या पुराने दौर की तस्वीरों जैसा लुक भी तैयार कर रहे हैं। लेकिन सवाल यह है कि क्या सोशल मीडिया पर कुछ मिनट की वायरल लोकप्रियता के लिए अपनी निजी तस्वीर की सुरक्षा को नजरअंदाज करना सही है? AI का इस्तेमाल करें, लेकिन समझदारी के साथ। किसी भी प्लेटफॉर्म पर फोटो अपलोड करने से पहले यह जरूर देखें कि वह प्लेटफॉर्म आपकी तस्वीर और डेटा के साथ क्या करता है। अनजान वेबसाइट या ऐप पर संवेदनशील तस्वीरें अपलोड करने से बचें और अपनी निजी जानकारी की सुरक्षा को प्राथमिकता दें। बड़ा सवाल यह है कि जब भारत में AI-generated visuals का इस्तेमाल अरबों के आंकड़े तक पहुंच चुका है और बड़े नेता-मंत्री भी AI फोटो ट्रेंड का हिस्सा बन रहे हैं, तो क्या अब समय नहीं आ गया कि आम जनता को AI फोटो के संभावित जोखिमों और डिजिटल प्राइवेसी के बारे में बड़े स्तर पर जागरूक किया जाए?
ट्रेंड अपनाना गलत नहीं है, लेकिन अपनी डिजिटल पहचान की सुरक्षा को लेकर सावधान रहना भी उतना ही जरूरी है।
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