जनता का अनाज छोड़, नोटों की गिनती में लगे थे साहब… रंगे हाथ पकड़े गए, 90 हजार की भूख भारी पड़ी… खाद्य निरीक्षक सीधे जेल के ‘गोदाम’ में शिफ्ट....!
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बिलासपुर। मस्तूरी ब्लॉक में पदस्थ खाद्य निरीक्षक श्याम वस्त्रकार की ‘सेवा भावना’ आखिरकार एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) के कैमरे में कैद हो ही गई। कार्रवाई न करने के एवज में लाखों की डील करने वाले साहब 90 हजार रुपए लेते रंगे हाथ ऐसे पकड़े गए, मानो सिस्टम ने खुद ही भ्रष्टाचार पर रेड डाल दी हो।
जानकारी के अनुसार, ग्राम पंचायत विद्याडीह के शासकीय उचित मूल्य दुकान संचालक से पहले 1 लाख 20 हजार रुपए की मांग की गई थी। 30 हजार रुपए पहले ही दिए जा चुके थे, लेकिन साहब का ‘भोजन’ शायद पूरा नहीं हुआ था, इसलिए शेष 90 हजार के लिए दबाव जारी रहा। परेशान होकर दुकानदार ने ACB का दरवाजा खटखटाया और फिर वही हुआ जो फिल्मों में होता है—जाल बिछा, नोट सजे और साहब सीधे गिरफ्त में आ गए।
शनिवार को जब आरोपी को न्यायालय में पेश किया गया, तो न्यायालय ने भी बिना देर किए 15 दिन की न्यायिक हिरासत का रास्ता दिखा दिया। यानी अब ‘निरीक्षण’ की जिम्मेदारी जेल प्रशासन के पास रहेगी।
पुराने किस्से भी कम नहीं…
सूत्र बताते हैं कि यह पहला मौका नहीं है जब श्याम वस्त्रकार का नाम सुर्खियों में आया हो। तखतपुर में पदस्थापना के दौरान भी ऑनलाइन रिश्वत लेने और फिर कार्रवाई करने का मामला चर्चा में रहा था। शिकायतें हुईं, जांच के आदेश भी दिए गए, मुख्यालय अटैच भी किया गया—लेकिन सिस्टम की मेहरबानी देखिए, कुछ समय बाद फिर से जिम्मेदारी मिल गई।
अब सवाल यही है कि जब आरोपों का ‘राशन कार्ड’ पहले से भरा हुआ था, तो दोबारा प्रभार देने की जल्दी किसे थी? फिलहाल ACB की इस कार्रवाई ने यह जरूर साबित कर दिया है कि रिश्वत की थाली कभी भी उलट सकती है — बस इंतजार होता है सही वक्त और सही जाल का।



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