बिलासपुर के सकरी में अवैध प्लाटिंग पर निगम का बुलडोजर: 3.50 एकड़ कॉलोनी समेत तीन स्थानों पर बड़ी कार्रवाई, उठे कई सवाल...?????
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बिलासपुर। नगर निगम बिलासपुर ने अवैध प्लाटिंग, अतिक्रमण और बिना अनुमति किए जा रहे निर्माण कार्यों के खिलाफ सोमवार को सकरी क्षेत्र में बड़ा अभियान चलाया। निगम आयुक्त के निर्देश पर की गई इस कार्रवाई के दौरान तीन अलग-अलग स्थानों पर अवैध निर्माण और प्लाटिंग को निशाना बनाया गया। निगम की इस कार्रवाई से अवैध कॉलोनाइजरों और बिल्डरों में हड़कंप की स्थिति देखी गई।
नगर निगम को लगातार शिकायतें प्राप्त हो रही थीं कि सकरी क्षेत्र में बिना वैधानिक अनुमति के प्लाटिंग कर भूखंडों की बिक्री की जा रही है और निर्माण कार्य भी संचालित किए जा रहे हैं। शिकायतों के सत्यापन के बाद निगम का अमला राजस्व विभाग और अन्य अधिकारियों के साथ मौके पर पहुंचा और कार्रवाई शुरू की।
सांई आनंद के पास अवैध प्लाटिंग पर कार्रवाई
अभियान की शुरुआत सांई आनंद के समीप स्थित क्षेत्र से की गई, जहां अवैध रूप से प्लाटिंग किए जाने और निर्माण कार्य संचालित होने की शिकायत निगम को मिली थी। अधिकारियों ने मौके का निरीक्षण किया और नियमों के उल्लंघन पाए जाने पर अवैध रूप से विकसित की जा रही संरचनाओं को हटाने की कार्रवाई शुरू की।
चमन गोल्ड कॉलोनी में चला बुलडोजर
नगर निगम की टीम ने सैदा रोड स्थित चमन गोल्ड कॉलोनी में भी बड़ी कार्रवाई की। जानकारी के अनुसार कॉलोनी के प्रोपराइटर अनूप चड्डा द्वारा लगभग 3.50 एकड़ भूमि पर कॉलोनी विकसित किए जाने की शिकायत लंबे समय से निगम को प्राप्त हो रही थी।
जांच के दौरान प्रारंभिक स्तर पर अनियमितताएं सामने आने के बाद निगम अमला मौके पर पहुंचा और अवैध विकास कार्यों के खिलाफ कार्रवाई की। अधिकारियों का कहना है कि बिना आवश्यक स्वीकृति और नियमों का पालन किए विकसित की जा रही कॉलोनियों के विरुद्ध आगे भी सख्त कदम उठाए जाएंगे।
सरकारी जमीन पर निर्माण ध्वस्त
सकरी क्षेत्र में शासकीय भूमि पर किए गए अतिक्रमण के खिलाफ भी निगम ने कड़ा रुख अपनाया। निगम की टीम ने संजय भार्गव द्वारा कथित रूप से सरकारी भूमि पर तैयार की गई नींव को तोड़ने की कार्रवाई की। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि शासकीय भूमि पर किसी भी प्रकार का अवैध निर्माण स्वीकार नहीं किया जाएगा।
कार्रवाई के दौरान नगर निगम के अधिकारी, राजस्व अमला और अन्य कर्मचारी मौजूद रहे। पूरे अभियान को प्रशासनिक निगरानी में शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराया गया।
लेकिन उठ रहे हैं बड़े सवाल
नगर निगम की कार्रवाई के बाद अब कई सवाल भी सामने आ रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि किसी क्षेत्र में वर्षों तक प्लाटिंग, सड़क निर्माण और भूखंडों की बिक्री होती रही तो क्या इसकी जानकारी संबंधित विभागों को पहले से नहीं थी? ग्रामीण क्षेत्रों में कोटवार, पटवारी, पंचायत प्रतिनिधि, पार्षद और अन्य जनप्रतिनिधि लगातार सक्रिय रहते हैं। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि अवैध प्लाटिंग और निर्माण कार्य आखिर किसकी नजरों से ओझल रहे? स्थानीय नागरिकों का मानना है कि यदि प्रारंभिक स्तर पर ही कार्रवाई की जाती तो लोगों को आर्थिक नुकसान और विवादों का सामना नहीं करना पड़ता। वहीं कुछ लोगों का कहना है कि शिकायत मिलने और कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही प्रशासन कार्रवाई कर सकता है।
निगम का स्पष्ट संदेश
नगर निगम अधिकारियों ने कहा है कि शहर और आसपास के क्षेत्रों में अवैध प्लाटिंग, अतिक्रमण और बिना अनुमति किए जा रहे निर्माण कार्यों के खिलाफ अभियान लगातार जारी रहेगा। नियमों का उल्लंघन करने वाले व्यक्तियों, कॉलोनाइजरों और भू-माफियाओं के विरुद्ध नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल निगम की इस कार्रवाई को अवैध निर्माण और भू-माफियाओं के खिलाफ बड़ी कार्रवाई माना जा रहा है, लेकिन जनता के बीच यह सवाल अब भी चर्चा का विषय बना हुआ है कि "जब अवैध निर्माण हो रहा था तब जिम्मेदार विभाग क्या कर रहे थे?" क्या अवैध निर्माण शुरू होते ही उसे रोकना प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं है? अपनी राय कमेंट में जरूर बताएं।





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