बिलासपुर आबकारी विभाग की कार्रवाई पर गंभीर आरोप, SI वेद नेताम सवालों के घेरे में, युवक से मारपीट का आरोप, तीन महीने पहले ₹5 हजार लेने का दावा; दोबारा पैसे मांगने का आरोप, बिना वर्दी ड्यूटी को लेकर भी उठे सवाल
बिलासपुर। आबकारी विभाग की एक कार्रवाई को लेकर बिलासपुर में विवाद गहराता जा रहा है। पीड़ित परिवार ने आबकारी विभाग के कर्मचारियों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। परिवार का दावा है कि करीब तीन महीने पहले कार्रवाई के नाम पर उनसे ₹5 हजार लिए गए थे। अब दोबारा फोन कर उन्हें आबकारी कार्यालय बुलाया गया, जहां फिर से पैसे की मांग किए जाने का आरोप लगाया गया है।
पीड़ित परिवार का कहना है कि वे शराब की बिक्री नहीं करते हैं। परिवार के मुताबिक, डिस्पोजल और पानी के पाउच को जब्ती का आधार बनाकर कार्रवाई की गई थी। आरोप है कि उस कार्रवाई के बाद उनसे ₹5 हजार लिए गए।
दोबारा बुलाने पर विवाद, युवक से मारपीट का आरोप
परिवार के अनुसार, कुछ समय बाद उन्हें दोबारा आबकारी कार्यालय बुलाया गया। यहां पहुंचने के बाद मामला विवाद में बदल गया। पीड़ित पक्ष ने आरोप लगाया कि कार्यालय में युवक के साथ मारपीट की गई।
देखे पूरा वीडियो......
हालांकि, मारपीट और पैसे लिए जाने के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। मामले की वास्तविक स्थिति जांच और संबंधित दस्तावेज सामने आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
मीडिया के पहुंचने के बाद बढ़ा विवाद
मामले की जानकारी मिलने पर मीडिया रिपोर्टर आबकारी कार्यालय पहुंचे और विभाग का पक्ष जानने का प्रयास किया। इसी दौरान वहां मौजूद लोगों के बीच तीखी बहस की स्थिति बन गई।
वायरल वीडियो में आबकारी विभाग की एक महिला आरक्षक और मीडिया रिपोर्टर के बीच तीखी बहस होती दिखाई देने की बात सामने आई है। महिला आरक्षक द्वारा खुद को मीडिया/प्रेस से जुड़ा होने की बात कहे जाने का भी दावा किया जा रहा है।
इस घटनाक्रम ने एक अलग सवाल खड़ा कर दिया है कि यदि कोई व्यक्ति सरकारी विभाग में पदस्थ कर्मचारी है और ड्यूटी पर है, तो वह स्वयं को मीडिया से जुड़ा बताकर मीडिया रिपोर्टर से बहस क्यों कर रहा था?
SI वेद नेताम भी बिना वर्दी नजर आए
इस पूरे मामले में आबकारी विभाग के SI वेद नेताम भी सवालों के घेरे में हैं। घटनास्थल के वीडियो में वे बिना वर्दी के कार्यालय में टेबल पर बैठकर काम करते नजर आने की बात सामने आई है।
वहीं, महिला आरक्षक के भी बिना वर्दी मौजूद होने की बात कही जा रही है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या उस समय दोनों कर्मचारी आधिकारिक ड्यूटी पर थे? यदि वे सरकारी ड्यूटी पर थे, तो बिना वर्दी ड्यूटी करने के संबंध में विभागीय नियम क्या कहते हैं?
यह बिंदु भी विभागीय स्तर पर स्पष्ट किया जाना जरूरी है।
SI वेद नेताम ने आरोपों को बताया झूठा
दूसरी ओर, SI वेद नेताम ने उनके ऊपर लगाए गए आरोपों को झूठा बताया है। यानी एक तरफ पीड़ित परिवार गंभीर आरोप लगा रहा है, जबकि संबंधित अधिकारी आरोपों से इनकार कर रहे हैं।
ऐसे में अब पूरे मामले में निष्पक्ष जांच की जरूरत और बढ़ जाती है।
₹5 हजार लौटाने की मांग पर अड़ा परिवार
मीडिया के हस्तक्षेप के बाद जब आबकारी विभाग के अधिकारियों ने पीड़ित परिवार से बातचीत की, तो परिवार को कोर्ट में चालान जमा करने की बात कही गई।
इस पर पीड़ित परिवार ने कथित तौर पर साफ कहा कि हमने जो ₹5 हजार दिए हैं और आपने जो लिए हैं, वह रकम वापस कर दीजिए, हम कोर्ट में चालान खुद जमा कर देंगे।
इसके बाद परिवार का दावा है कि आबकारी विभाग के अधिकारी, निरीक्षक और आरक्षक मिलकर उन्हें समझाने लगे कि आप लोग चालान मत पटाइए, हम चालान जमा कर देंगे।
अब यही पूरा घटनाक्रम कई सवाल खड़े कर रहा है कि यदि मामला न्यायालय में चालान जमा करने का था, तो पहले कथित रूप से ₹5 हजार लेने का आरोप क्यों सामने आया और परिवार से दोबारा किस आधार पर राशि की मांग की गई?
उठ रहे हैं कई बड़े सवाल
पूरे मामले में अब कई सवालों के जवाब जांच के बाद सामने आने जरूरी हैं—
क्या करीब तीन महीने पहले परिवार से ₹5 हजार लिए गए थे?
क्या परिवार को दोबारा आबकारी कार्यालय बुलाकर पैसे की मांग की गई?
क्या डिस्पोजल और पानी के पाउच को जब्ती का आधार बनाया गया था?
क्या आबकारी कार्यालय में युवक के साथ मारपीट हुई?
क्या SI वेद नेताम उस समय आधिकारिक ड्यूटी पर थे?
यदि ड्यूटी पर थे तो वे बिना वर्दी क्यों थे?
महिला आरक्षक बिना वर्दी क्यों मौजूद थीं?
सरकारी कर्मचारी द्वारा स्वयं को मीडिया/प्रेस से जुड़ा बताकर रिपोर्टर से बहसबाजी करने की स्थिति क्यों बनी?
यदि परिवार को कोर्ट में चालान जमा करना था, तो विभागीय अधिकारी स्वयं चालान जमा करने की बात क्यों कह रहे थे?
फिलहाल पीड़ित परिवार द्वारा लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। SI वेद नेताम ने आरोपों को झूठा बताया है। ऐसे में मामले की सच्चाई विभागीय रिकॉर्ड, जब्ती पंचनामा, चालान से जुड़े दस्तावेज, कथित लेन-देन के साक्ष्य, वीडियो फुटेज और निष्पक्ष जांच के आधार पर ही सामने आ सकती है।
अब देखने वाली बात यह होगी कि आबकारी विभाग इन गंभीर आरोपों पर क्या स्पष्टीकरण देता है और क्या पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाती है।





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