शिक्षा के मंदिर में शर्मनाक खेल! नशे में स्कूल आने वाले प्रधानपाठक पर बच्चों के गंभीर आरोप, अभिभावकों में भारी
आक्रोश
मुंगेली :विशेष रिपोर्ट
गुरु को भगवान का दर्जा दिया जाता है, क्योंकि वही बच्चों के भविष्य का निर्माण करता है। लेकिन जब शिक्षक का आचरण ही सवालों के घेरे में आ जाए, तो शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े होना स्वाभाविक है।
एसा ही एक मामला मुंगेली जिला मुख्यालय से लगभग 5 किलोमीटर दूर ग्राम चमारी (रोहरा) स्थित शासकीय प्राथमिक शाला से सामने आया है। यहां कक्षा पहली से पांचवीं तक कुल 26 छात्र-छात्राएं अध्ययनरत हैं। स्कूल में शासन द्वारा दो शिक्षकों की पदस्थापना की गई है एक प्रधानपाठक और एक सहायक शिक्षक।स्कूल पहुंचे तो प्रधानपाठक मिले ही नहीं
जानकारी मिलने पर जब मीडिया टीम स्कूल पहुंची, तब स्कूल में केवल सहायक शिक्षक मौजूद थीं। पूछने पर उन्होंने बताया कि प्रधानपाठक इंद्रा सिंह कंवर अक्सर स्कूल नहीं आते, कभी-कभार ही आते हैं।
इसके बाद जब स्कूल के बच्चों और ग्रामीणों से बातचीत की गई तो कई गंभीर आरोप सामने आए।
बच्चों का आरोप—शराब पीकर आते हैं, गाली देते हैं और मारपीट करते हैं
ये हैँ वो प्रधानपाठक
स्कूल के बच्चों और अभिभावकों का आरोप है कि प्रधानपाठक इंद्रा सिंह कंवर कई बार शराब के नशे में स्कूल पहुंचते हैं। इतना ही नहीं, आरोप है कि वे स्कूल परिसर में भी शराब का सेवन करते हैं। बच्चों का कहना है कि जब वे इसका विरोध करते हैं तो प्रधानपाठक कक्षा का दरवाजा और खिड़कियां बंद कर उन्हें गंदी-गंदी गालियां देते हैं तथा मारपीट भी करते हैं।
यदि ये आरोप सही पाए जाते हैं तो यह न केवल शिक्षा व्यवस्था बल्कि बच्चों की सुरक्षा और उनके भविष्य के लिए भी बेहद गंभीर मामला है।
तीन बार निलंबित हो चुके हैं
ग्रामीणों का यह भी कहना है कि संबंधित प्रधानपाठक अपने सेवाकाल में तीन बार निलंबित हो चुके हैं और हर बार प्रभाव एवं पहचान के बल पर पुनः सेवा में बहाल हो गए। हालांकि, इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है।
ग्रामीणों की मांग
गांव के लोगों और अभिभावकों ने प्रशासन से मांग की है कि
प्रधानपाठक के खिलाफ निष्पक्ष जांच कर कड़ी कार्रवाई की जाए।
स्कूल में नियमित एवं जिम्मेदार शिक्षक की पदस्थापना की जाए।
बच्चों के हित में स्कूल में शौचालय और पेयजल (हैंडपंप/पंप) की उचित व्यवस्था की जाए।
प्रशासनिक जांच के बाद ही होगी सच्चाई स्पष्ट
प्रधानपाठक पर लगाए गए आरोप गंभीर हैं। इन आरोपों की निष्पक्ष जांच के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी। यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित शिक्षक के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई होना चाहिए हैक्यूंकि ये उन मासूम बच्चों के भविष्य का सवाल है , वहीं यदि आरोप निराधार सिद्ध होते हैं तो यह भी स्पष्ट होना चाहिए।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है,क्या शिक्षा के मंदिर में बच्चों का भविष्य सुरक्षित है, या फिर जिम्मेदार अधिकारियों की कार्रवाई का इंतजार जारी रहेगा?





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