पहली ही बारिश में बह गई 31.89 लाख की सड़क! जिला अस्पताल मार्ग पर गड्ढों का राज, PWD और ठेकेदार पर उठे गंभीर सवाल
प्रदेश के उप मुख्यमंत्री अरुण साव द्वारा मुंगेली नगर के विकास के लिए लगातार करोड़ों रुपये की स्वीकृति दी जा रही है, ताकि शहर और आसपास के क्षेत्रों में बेहतर बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध हो सकें। लेकिन विकास कार्यों की गुणवत्ता और निगरानी को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। मुंगेली-रायपुर मुख्य मार्ग से जिला अस्पताल एवं रेहूंटा गांव को जोड़ने वाली सड़क पहली ही बारिश में बुरी तरह उखड़ गई है, जिससे लोक निर्माण विभाग (PWD) और संबंधित ठेकेदार की कार्यशैली पर सवाल उठ रहे हैं।
31.89 लाख रुपये से बना था 500 मीटर का मार्ग
जानकारी के अनुसार, नगर पालिका क्षेत्र के परमहंस वार्ड स्थित लगभग 500 मीटर लंबे इस महत्वपूर्ण मार्ग के डामरीकरण के लिए नवंबर 2025 में लोक निर्माण विभाग द्वारा निविदा जारी की गई थी। करीब 31 लाख 89 हजार रुपये की लागत वाले इस कार्य का ठेका बिलासपुर की आदित्य ग्लाइकोल्स एजेंसी को दिया गया था।
लेकिन सड़क निर्माण के कुछ ही महीनों बाद पहली बारिश में ही डामर उखड़ गया और पूरी सड़क बड़े-बड़े गड्ढों में तब्दील हो गई। कई स्थानों पर जलभराव होने से सड़क तालाब जैसी दिखाई दे रही है, जिससे राहगीरों और वाहन चालकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
भुगतान पूरा, सड़क अधूरी गुणवत्ता की शिकार
स्थानीय लोगों का आरोप है कि निर्माण कार्य में गुणवत्ता मानकों की अनदेखी की गई। हैरानी की बात यह भी है कि जनवरी 2026 में ठेकेदार को कार्य का पूरा भुगतान कर दिया गया, जबकि सड़क की स्थिति कुछ ही समय में बदहाल हो गई। इससे विभागीय निरीक्षण और गुणवत्ता परीक्षण की प्रक्रिया पर भी सवाल उठ रहे हैं।
जिला अस्पताल तक पहुंचना हुआ मुश्किल
यह मार्ग जिला अस्पताल और रेहूंटा गांव को जोड़ने वाला प्रमुख संपर्क मार्ग है। प्रतिदिन इसी सड़क से मरीज, एम्बुलेंस, ग्रामीण और आम नागरिक आवागमन करते हैं। सड़क की खराब हालत के कारण दुर्घटना की आशंका बढ़ गई है और मरीजों को अस्पताल पहुंचाने में भी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
जनता का आरोप
अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों ने नहीं निभाई जिम्मेदारी
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि निर्माण कार्य के दौरान ही गुणवत्ता को लेकर कई सवाल उठे थे, लेकिन लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों ने समय रहते निरीक्षण या हस्तक्षेप नहीं किया। लोगों का आरोप है कि जिम्मेदारों की चुप्पी के कारण ठेकेदार ने मनमानी की और परिणामस्वरूप लाखों रुपये की सड़क पहली ही बारिश में जवाब दे गई।
सबसे बड़ा सवाल
जवाबदेह कौन?
प्रदेश सरकार विकास कार्यों के लिए लगातार बड़ी राशि उपलब्ध करा रही है, लेकिन यदि निर्माण कार्य गुणवत्ता के अभाव में कुछ ही महीनों में धराशायी हो जाएं, तो यह केवल ठेकेदार की लापरवाही नहीं बल्कि पूरे निगरानी तंत्र की विफलता को दर्शाता है।
अब सवाल यह है कि क्या इस मामले में गुणवत्ता की जांच कर दोषियों पर कार्रवाई होगी? क्या जनता के टैक्स के पैसों की जवाबदेही तय की जाएगी, या फिर विकास कार्यों के नाम पर सरकारी धन की बर्बादी का यह सिलसिला इसी तरह जारी रहेगा?





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