मुंगेली में लाखों की कथित अवैध वसूली का आरोप, CEO और पूर्व DPRO के खिलाफ मुख्यमंत्री से शिकायत
मुंगेली। जिले में स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर पत्रकारों को मिठाई और सौजन्य भेंट के नाम पर शासकीय विभागों से कथित तौर पर लाखों रुपये की राशि जुटाए जाने का मामला सामने आया है। पत्रकार खेमेश्वर पुरी गोस्वामी ने इस संबंध में मुख्यमंत्री के नाम शिकायत प्रस्तुत कर पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग की है।
शिकायतकर्ता ने मुंगेली जिला पंचायत के सीईओ गोकुल रावटे और तत्कालीन जिला जनसंपर्क अधिकारी सुजीत सिंह, जो वर्तमान में रायगढ़ में पदस्थ बताए गए हैं, पर गंभीर वित्तीय अनियमितताओं के आरोप लगाए हैं। शिकायत में मामले की जांच एसीबी या ईओडब्ल्यू से कराने की मांग की गई है।
32 से 35 लाख रुपये जुटाने का आरोप
शिकायत के अनुसार, जिले के विभिन्न शासकीय विभागों से प्रति विभाग करीब 50 हजार से 1 लाख रुपये तक की राशि कथित रूप से जुटाई गई। शिकायतकर्ता का दावा है कि इस तरह लगभग 32 से 35 लाख रुपये की राशि एकत्र की गई।
आरोप है कि यह राशि तत्कालीन जिला जनसंपर्क अधिकारी को सौंपे जाने के बाद इसका कोई स्पष्ट शासकीय लेखा-जोखा सामने नहीं आया और राशि के कथित दुरुपयोग की आशंका है।
हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है और मामले की वास्तविक स्थिति जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
DDOs के खातों के ऑडिट की मांग
शिकायतकर्ता ने जिले के सभी आहरण एवं संवितरण अधिकारियों यानी DDOs के खातों का गोपनीय वित्तीय ऑडिट कराने की मांग की है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि संबंधित विभागों से किसी प्रकार की राशि निकाली या हस्तांतरित की गई थी या नहीं।
इसके साथ ही शिकायत में जांच पूरी होने तक संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध आवश्यक प्रशासनिक कार्रवाई किए जाने की मांग भी की गई है, ताकि जांच के दौरान साक्ष्यों से किसी तरह की छेड़छाड़ की आशंका न रहे।
CEO ने आरोपों से किया किनारा
मामले को लेकर जिला पंचायत सीईओ गोकुल रावटे से संपर्क किए जाने पर उन्होंने आरोपों से खुद को अलग बताया। उनके अनुसार, उच्च अधिकारी के निर्देश पर उन्होंने कुछ विभागों को सहयोग करने के लिए कहा था, लेकिन किसी राशि का निर्धारण नहीं किया गया था।
सीईओ ने कथित राशि के संबंध में जिम्मेदारी जिला जनसंपर्क अधिकारी की ओर होने की बात कही।
वहीं, तत्कालीन जिला कलेक्टर कुन्दन कुमार से मामले में प्रतिक्रिया लेने के लिए संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उनसे संपर्क नहीं हो सका।
अब जांच पर टिकी नजर
शिकायत सामने आने के बाद पूरे मामले को लेकर प्रशासनिक स्तर पर चर्चाएं तेज हो गई हैं। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या वास्तव में शासकीय विभागों से पत्रकारों या राष्ट्रीय पर्व के नाम पर कोई राशि एकत्र की गई थी? यदि राशि जुटाई गई थी तो उसका उपयोग कहां हुआ और उसका आधिकारिक लेखा-जोखा क्या है?
इन तमाम सवालों का जवाब निष्पक्ष जांच और वित्तीय रिकॉर्ड की जांच के बाद ही सामने आ सकेगा।




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